देश की करेंसी प्रणाली में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Reserve Bank of India एक बार फिर प्लास्टिक नोटों को लेकर गंभीरता से विचार कर रहा है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है, तो यह भारत की मुद्रा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव माना जाएगा।
फिलहाल भारत में जो नोट इस्तेमाल हो रहे हैं, वे विशेष प्रकार के कॉटन-बेस्ड कागज से बनाए जाते हैं। लेकिन प्लास्टिक नोटों को अधिक टिकाऊ, पानी और फटने से सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाला माना जाता है। इसी वजह से कई देश पहले ही इस तकनीक को अपनाकर अपने नोट सिस्टम को मजबूत कर चुके हैं।
भारत में इससे पहले भी 2012 के आसपास कुछ शहरों में प्लास्टिक नोटों के पायलट प्रोजेक्ट की योजना बनाई गई थी, लेकिन तकनीकी चुनौतियों और अन्य कारणों की वजह से इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
अब फिर से इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि लगातार बढ़ती प्रिंटिंग लागत और नोटों की जल्दी खराब होने की समस्या को देखते हुए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। माना जा रहा है कि प्लास्टिक नोट न केवल ज्यादा टिकाऊ होंगे, बल्कि लंबे समय में लागत को भी कम कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह बदलाव लागू होता है, तो नोटों की सुरक्षा और नकली नोटों पर नियंत्रण के लिहाज से भी नई तकनीकें शामिल की जा सकती हैं, जिससे वित्तीय सिस्टम और मजबूत हो सकता है।
हालांकि इस तरह के बदलाव में सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन लागत, वितरण व्यवस्था और पूरे देश में नई करेंसी को लागू करना होता है। इसलिए अभी यह केवल विचार और संभावनाओं के स्तर पर ही माना जा रहा है।
फिलहाल देश की नजर इस बात पर है कि क्या भारत वास्तव में भविष्य में प्लास्टिक नोटों की ओर बढ़ेगा या यह विचार पहले की तरह फिर सीमित रह जाएगा।
written by :- Anjali Mishra
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