पाकिस्तान के मुल्ला जनरल कहे जाने वाले आसिम मुनीर ने पहलगाम हमले के बाद भारत को धमकी दी थी और किसी भी सैन्य कार्रवाई का करारा जवाब देने की बात कही थी। अब भारत ने हमला कर दिया और इसके कई घंटे बीत चुके हैं लेकिन अब तक जनरल मुनीर का कोई बयान नहीं आया है। पाकिस्तानी सेना इस समय बहुत बुरी तरह फंसी हुई है। भारत ने यह हमला ऐसे समय किया है, जब जनरल मुनीर देश के अंदर खैबर पख्तूनख्वा में एक बहुत महत्वपूर्ण लड़ाई लड़ रहे
पेशावर मुख्यालय स्थित कोर के सैनिक इस समय एक भीषण युद्ध में फंसे हुए हैं। पाकिस्तानी सेना ये लड़ाई तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से लड़ रही है, जिसने दक्षिण की ओर बढ़ते हुए खैबर-पख्तूनख्वा (KP) में छोटे-छोटे स्वतंत्र इलाके बना लिए हैं।
ऐसे में भारत के सैन्य ऑपरेशन के जवाब में अगर जनरल मुनीर कोई योजना बनाते हैं तो उन्हें नियंत्रण रेखा पर अधिक सैनिकों को तैनात करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यह पाकिस्तान के लिए भारत के हवाई हमलों की तुलना में कहीं घातक सिद्ध होगा। खासतौर पर जब केपी के उत्तरी वजीरिस्तान और दूसरे सीमावर्ती इलाकों में टीटीपी की उपस्थिति लगातार बढ़ती जा रही है।
खैबर पख्तूनख्वा के इलाकों में टीटीपी ने समानांतर शासन शुरू कर दिया है। अगर पाकिस्तानी सेना वहां से हटती है तो टीटीपी को और मजबूती मिलेगी। यह पाकिस्तानी सेना की इलाके में वापसी के लिए मुश्किल हो सकता है। सिर्फ खैबर पख्तूनख्वाह ही नहीं, पाकिस्तानी सेना के खिलाफ कट्टरपंथियों का विरोध बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह ही इस्लामाबाद स्थित मौलवी अब्दुल अजीज गाजी ने पाकिस्तान को कुफ्र स्टेट घोषित किया। उन्होंने अनुयायियों से ये कह दिया कि भारत के खिलाफ पाकिस्तानी सेना का पक्षा लेना इस्लामी कानून के तहत अस्वीकार्य है।
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बलूचिस्तान अलगाववादी आंदोलन तेज होने के साथ ही पाकिस्तान के लिए खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) भी सुरक्षित नहीं है। पिछले महीने की पाकिस्तान परमाणु ऊर्जा आयोग के लिए काम करने वाले 18 लोगों को लक्की मरवत की खदानों से अगवा कर लिया गया था। टीटीपी के लड़ाके सेना के जासूसी होने के शक में सरकारी अधिकारियों को प्रताड़ित कर रहे हैं। ऐसे में भारत के हमले के बाद जनरल आसिम मुनीर बुरी तरह फंस गए हैं। उनके लिए आगे कुआं और पीछे खाईं वाली स्थिति बन गयी है
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