केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के इस्तीफे की मांग भी तेज होती दिखाई दे रही है। प्रयागराज में छात्रों ने बेसिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से खाली पड़े करीब 1.26 लाख पदों पर जल्द शिक्षक भर्ती शुरू करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की है। छात्रों का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक पद खाली हैं, लेकिन इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार की ओर से स्पष्टता नहीं दिखाई जा रही है। ऐसे में युवाओं के बीच नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है और अब यह मुद्दा एक बड़े आंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है।
प्रयागराज में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सरकार के सामने अपनी मांग रखते हुए साफ चेतावनी दी है कि अगर अगले 5 दिनों के भीतर भर्ती को लेकर बातचीत शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। छात्रों का यह अल्टीमेटम ऐसे समय में सामने आया है, जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरियों और युवाओं के भविष्य को लेकर बहस तेज है। ऐसे में यूपी का यह आंदोलन सिर्फ शिक्षक भर्ती तक सीमित रहता है या फिर प्रदेश के बेरोजगार युवाओं की बड़ी आवाज बनता है, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी।
छात्रों की सबसे बड़ी दलील यह है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के इतने बड़े पद खाली हैं, तो सरकार को जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। युवाओं का कहना है कि वे वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। कई उम्मीदवार उम्र की सीमा पार करने की चिंता में हैं, तो कई ऐसे हैं जो लगातार परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होने से उनके सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यही वजह है कि अब छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है।
इस पूरे मामले में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठने लगे हैं। छात्रों की ओर से उनके इस्तीफे की मांग ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है। सवाल यह है कि क्या सरकार छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी मांगों का समाधान निकालने की कोशिश करेगी या फिर आंदोलन को आगे बढ़ने दिया जाएगा? क्योंकि अगर पांच दिन के अल्टीमेटम के बाद भी बातचीत नहीं होती है, तो छात्रों ने आंदोलन को और व्यापक करने का संकेत दिया है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था, सरकारी नौकरी, भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे सवाल अब सिर्फ छात्रों के मुद्दे नहीं रह गए हैं, बल्कि ये सीधे तौर पर लाखों परिवारों के भविष्य से जुड़े सवाल बन चुके हैं। ऐसे में प्रयागराज से उठी यह आवाज अगर दूसरे शहरों और जिलों तक पहुंचती है, तो सरकार के लिए इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उत्तर प्रदेश में भी युवाओं का यह आंदोलन सरकार पर दबाव बनाने में सफल होगा? क्या 1.26 लाख खाली पदों पर शिक्षक भर्ती को लेकर कोई ठोस घोषणा सामने आएगी? या फिर छात्रों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन को और लंबा खींचना पड़ेगा? पांच दिन का दिया गया समय अब इस पूरे विवाद में बेहद अहम हो गया है और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी होंगी।
अगर सरकार बातचीत का रास्ता अपनाती है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप सामने रखती है, तो आंदोलन को शांत करने की दिशा में यह बड़ा कदम हो सकता है। लेकिन अगर छात्रों की मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं होती, तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में यूपी सरकार के सामने सिर्फ एक भर्ती का सवाल नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों युवाओं के भरोसे और भविष्य से जुड़ा सवाल भी खड़ा है।
कुल मिलाकर, धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब संदीप सिंह के इस्तीफे की मांग ने यूपी की राजनीति में भी शिक्षा और रोजगार के मुद्दे को गर्म कर दिया है। प्रयागराज के छात्रों का पांच दिन का अल्टीमेटम अब सरकार के लिए अगली बड़ी परीक्षा बन चुका है। सवाल सिर्फ 1.26 लाख खाली पदों पर भर्ती का नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि क्या सरकार युवाओं की आवाज को समय रहते सुनेगी? क्योंकि अगर छात्रों का यह आंदोलन आगे बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में यह यूपी की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
written by:- Anjali Mishra
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