बिहार की सियासी जमीन पर इन दिनों सबसे गर्म मुद्दा है राबड़ी देवी का सरकारी आवास। RJD की तरफ़ से साफ कहा गया था कि “10 सर्कुलर रोड वाला बंगला खाली नहीं करेंगे।” जिस बयान ने राजनीति का तापमान बढ़ाया, उसी पर अब डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने सीधा, सख्त और बेबाक जवाब दिया है। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा “सरकारी घर किसी की बपौती नहीं होता, ये जनता की संपत्ति है।” उनके शब्दों ने साफ कर दिया कि कानून और व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार किसी भी दबाव में आने वाली नहीं है।
सम्राट चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि लालू परिवार से उनका कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है, बल्कि मामला केवल सिद्धांत और नियमों का है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास देने का कोई प्रावधान नहीं है। यानी चाहे राबड़ी देवी हों, नीतीश कुमार हों या कोई और कानून सबके लिए एक समान है। इससे सरकार यह संदेश देना चाहती है कि सत्ता बदलने के बाद पुरानी परंपराएँ नहीं, बल्कि नई पारदर्शिता चलेगी।
राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते जो आवास मिलना चाहिए था, वह पहले ही आवंटित किया जा चुका है 39 हार्डिंग रोड। सरकार का कहना है कि “कानूनी रूप से यही उनका अधिकृत आवास है।” लेकिन RJD इसे सीधे-सीधे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बता रही है। उनका आरोप है कि यह कदम सत्ता के बदलते समीकरणों का नतीजा है, जिसका उद्देश्य विपक्ष को कमजोर दिखाना है। इस तकरार ने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।
मामला अब सिर्फ एक बंगले का नहीं रहा यह प्रतिष्ठा और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई बन चुका है। RJD अपने रुख पर अड़ी हुई है, जबकि NDA सरकार पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं। सम्राट चौधरी की टिप्पणी ने यह साफ कर दिया कि बिहार सरकार इस मुद्दे पर कोई “विशेष दया” नहीं दिखाने वाली। उनका यह कहना कि “जनता की संपत्ति पर किसी का स्थायी अधिकार नहीं” एक तरह से पूरे विवाद का आधार बन गया है।
दूसरी ओर RJD इसे अपने कार्यकर्ताओं के लिए भावनात्मक मुद्दा बना रही है। पार्टी की कोर टीम इस मामले पर रणनीति बना रही है, क्योंकि जनमानस में ये बात तेजी से फैल रही है कि लगभग 19 साल से लालू परिवार जिस बंगले में रह रहा है, उससे हटाने की कोशिश हो रही है। यह RJD के लिए राजनीतिक अवसर भी बन सकता है लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा है।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि RJD अगला कदम क्या उठाएगी क्या वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे? क्या वे सड़क पर उतरेंगे? या कोई समझौते का रास्ता तलाशेंगे? फिलहाल इतना तय है कि यह मामला जल्दी थमने वाला नहीं, और आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को और गरम करेगा।
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