दिल्ली से गोवा जा रही इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट में उस समय हड़कंप मच गया जब उड़ान के दौरान अचानक एक इंजन में तकनीकी खराबी आ गई। फ्लाइट में कुल 180 से अधिक यात्री सवार थे और यह घटना हवा में 30,000 फीट की ऊंचाई पर हुई। जैसे ही पायलट को इंजन फेलियर का संकेत मिला, उन्होंने बिना समय गंवाए इमरजेंसी प्रोटोकॉल एक्टिवेट किया और नजदीकी मुंबई एयरपोर्ट से संपर्क साधा।
मुंबई एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत विशेष लैंडिंग कोरीडोर तैयार किया और प्राथमिकता के आधार पर एयरस्पेस को खाली कराया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान न केवल पायलट की सूझबूझ और अनुभव दिखाई दिया, बल्कि ATC की त्वरित प्रतिक्रिया ने भी हादसे की आशंका को टाल दिया। फ्लाइट ने निर्धारित उड़ान मार्ग से हटकर सुरक्षित रूप से मुंबई एयरपोर्ट पर आपात लैंडिंग की।
फ्लाइट के भीतर उस समय मौजूद यात्रियों ने घटना के बाद मीडिया से बात करते हुए बताया कि शुरुआत में उन्हें सिर्फ सामान्य कंपन महसूस हुआ था, लेकिन थोड़ी ही देर में कैबिन क्रू ने आपातकालीन निर्देश देना शुरू कर दिया। एक यात्री ने बताया, “हम घबरा तो गए थे, लेकिन क्रू और पायलट का संयम देखकर हमें भरोसा बना रहा। लैंडिंग के बाद तालियों की गूंज पूरे प्लेन में सुनाई दी।”
इंडिगो एयरलाइंस की ओर से आधिकारिक बयान जारी कर कहा गया कि “हमारे पायलटों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त है और यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। तकनीकी खराबी के बावजूद फ्लाइट को सुरक्षित रूप से लैंड करना हमारी टीम की प्रोफेशनल प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सभी यात्रियों को वैकल्पिक फ्लाइट्स से उनके गंतव्य तक भेजने की व्यवस्था की जा रही है।”
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इस घटना ने एक बार फिर एविएशन सेक्टर में तकनीकी निरीक्षण और इंजन मेंटेनेंस की गंभीरता को रेखांकित कर दिया है। इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइन पर यात्रियों की निर्भरता बहुत अधिक है, ऐसे में लगातार उड़ानों के बीच समय-समय पर व्यापक तकनीकी जांच की आवश्यकता है। डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) ने भी मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और रिपोर्ट मांगी गई है।
हालांकि यह घटना किसी बड़े हादसे में नहीं बदली, लेकिन यह भविष्य में संभावित खतरों की चेतावनी जरूर है। विमानन क्षेत्र में किसी भी स्तर पर लापरवाही हजारों जिंदगियों को खतरे में डाल सकती है। पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की सतर्कता ने इस बार एक त्रासदी को टाल दिया, लेकिन अब इंडस्ट्री को और सतर्क और पारदर्शी बनने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से पूरी तरह बचा जा सके।
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