उत्तर प्रदेश में फिलहाल ग्रीन कवर करीब 9% है, जिसे 2030 तक 15% करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस दिशा में कई योजनाएं शुरू की हैं जो पर्यावरणीय सुधार से कहीं बढ़कर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी नजर आती हैं। हरियाली की इस मुहिम में भाजपा का सामाजिक जुड़ाव भी साफ झलकता है, जो आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर बेहद सोच-समझकर डिजाइन किया गया लगता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लंबे समय से अपने जनसंपर्क कार्यक्रमों में महिलाओं और नवजात शिशुओं पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। हाल ही में बहराइच में राजा सुहेलदेव की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवजातों के नामकरण ‘सुहेलदेव’ के नाम पर किया। अब इससे आगे बढ़ते हुए, योगी सरकार ने नवजातों को ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ देने की घोषणा की है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और महिलाओं के भावनात्मक जुड़ाव को साथ जोड़ा जा सके।
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यह पहल न सिर्फ हरित भविष्य की ओर एक प्रतीकात्मक कदम है, बल्कि महिलाओं और मातृत्व को लक्षित कर भाजपा के जनाधार को भी मजबूत करने की रणनीति है। नवजात और पर्यावरण को एक साथ जोड़कर योगी सरकार आधी आबादी से अपना जुड़ाव और गहरा करना चाहती है। इससे बीजेपी को महिला मतदाताओं के बीच भावनात्मक समर्थन हासिल करने में मदद मिल सकती है।
विपक्ष के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव का मुकाबला योगी सरकार महापुरुषों के नाम पर ‘हरित श्रद्धांजलि’ देकर कर रही है। अटल बिहारी वाजपेयी, सरदार पटेल और बिरसा मुंडा जैसे महापुरुषों की स्मृति में विशेष वन क्षेत्र तैयार किए जा रहे हैं। यह कदम न सिर्फ पर्यावरणीय प्रतीक है, बल्कि बीजेपी के परंपरागत समर्थक वर्ग को फिर
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