हैदराबाद की राजनीति से निकलकर अब उत्तर प्रदेश के सियासी मैदान में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने की कोशिश कर रहे Asaduddin Owaisi ने एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। एक जनसभा के दौरान ओवैसी ने अपने समर्थकों के बीच खास अंदाज में घोषणा करते हुए कहा कि वह जनता की इजाजत लेकर एक महत्वपूर्ण ऐलान करना चाहते हैं। उनके इस बयान के बाद सभा में मौजूद लोगों का उत्साह चरम पर पहुंच गया और समर्थकों ने जोरदार समर्थन दिखाया। इसके बाद ओवैसी ने लोगों से मोबाइल की टॉर्च जलाकर समर्थन जताने की अपील की और दावा किया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी पार्टी का प्रभाव और बढ़ेगा।
रैली के दौरान माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में नजर आया। समर्थकों के नारों और जोशीले माहौल के बीच ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी की रणनीति को खुलकर सामने रखा। इसी मंच से उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को बहराइच जिले की मटेरा विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस घोषणा को सिर्फ एक प्रत्याशी के चयन के तौर पर नहीं, बल्कि यूपी में पार्टी के विस्तार की दिशा में बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
ओवैसी लंबे समय से उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि पिछले चुनावों में उनकी पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन वह लगातार संगठन विस्तार और नए क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। मटेरा सीट से उम्मीदवार की घोषणा इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि स्थानीय मुद्दों और संगठनात्मक मजबूती के सहारे वह इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं।
सभा के दौरान ओवैसी ने केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi की नीतियों की आलोचना की, वहीं Akhilesh Yadav और उनकी पार्टी पर भी सवाल उठाए। ओवैसी का यह रुख बताता है कि वह खुद को केवल भाजपा विरोधी राजनीति तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि विपक्षी दलों को भी सीधी चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी की सक्रियता का सबसे ज्यादा असर समाजवादी पार्टी की राजनीति पर पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में जहां मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव है, वहां एआईएमआईएम की मौजूदगी विपक्षी वोटों के समीकरण को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि ओवैसी की हर नई राजनीतिक गतिविधि पर सपा और अन्य दलों की नजर बनी हुई है।
हालांकि यह भी सच है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्थायी प्रभाव स्थापित करना किसी भी बाहरी दल के लिए आसान नहीं रहा है। राज्य की राजनीतिक संरचना, जातीय समीकरण और स्थानीय नेतृत्व की ताकत चुनावी परिणामों को काफी प्रभावित करती है। ऐसे में केवल बड़ी रैलियों और घोषणाओं से आगे बढ़कर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना ओवैसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश में ओवैसी की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। मटेरा सीट से उम्मीदवार की घोषणा के साथ उन्होंने साफ संकेत दिया है कि उनकी पार्टी आगामी चुनावी मुकाबलों में अधिक आक्रामक भूमिका निभाने की तैयारी कर रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह सियासी दांव चुनावी नतीजों में कितना असर दिखाता है और क्या वाकई उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनते हैं।
written by:- Anjali Mishra
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