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पंचायत चुनाव पर संकट: कार्यकाल बढ़ाने की मांग तेज, सरकार के फैसले पर टिकी नजर !

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति लगातार उलझती नजर आ रही है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल हो गया है कि चुनाव तय समय पर हो पाएंगे या नहीं। इसी अनिश्चितता के बीच प्रदेश भर के ग्राम प्रधान अब एकजुट होकर अपनी मांगों को सामने ला रहे हैं।

ग्राम प्रधानों का कहना है कि यदि समय पर चुनाव नहीं होते हैं, तो सरकार को उनका कार्यकाल बढ़ाना चाहिए। उनका तर्क है कि गांवों में यदि प्रशासक बैठा दिए जाते हैं, तो विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है और स्थानीय जरूरतों को सही तरीके से नहीं समझा जा पाता।

दरअसल, राज्य की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। इसके बाद यदि नई पंचायतों का गठन नहीं हो पाता, तो प्रशासनिक व्यवस्था लागू करनी पड़ेगी। यह स्थिति ग्रामीण विकास के लिहाज से चिंताजनक मानी जा रही है।

वहीं दूसरी ओर, चुनाव प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा वोटर लिस्ट 10 जून को जारी होने वाली है। यानी कार्यकाल खत्म होने और मतदाता सूची तैयार होने के बीच स्पष्ट समय अंतर है, जो चुनाव कराने में बाधा बन सकता है।

इस पूरे मामले में कानूनी पेच भी सामने आ रहा है। पंचायत चुनाव से जुड़ा मामला फिलहाल इलाहाबाद हाई कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट के फैसले का भी चुनाव कार्यक्रम पर सीधा असर पड़ सकता है।

ग्राम प्रधानों का मानना है कि जब तक कोर्ट और सरकार की ओर से स्थिति साफ नहीं होती, तब तक प्रशासनिक असमंजस बना रहेगा। इसलिए उन्होंने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है, ताकि गांवों में कामकाज प्रभावित न हो।

यदि सरकार कार्यकाल नहीं बढ़ाती और प्रशासकों की नियुक्ति करती है, तो इससे स्थानीय स्तर पर जवाबदेही कम हो सकती है। ग्राम प्रधान सीधे जनता से जुड़े होते हैं, जबकि प्रशासक एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में काम करते हैं।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि पंचायतें ग्रामीण विकास की रीढ़ होती हैं। ऐसे में यदि उनके कामकाज में रुकावट आती है, तो इसका असर सड़कों, पानी, सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर पड़ सकता है।

अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी है। सरकार को कानूनी स्थिति, प्रशासनिक जरूरत और ग्रामीण हित—तीनों को ध्यान में रखते हुए संतुलित फैसला लेना होगा।

कुल मिलाकर, पंचायत चुनाव को लेकर बनी यह अनिश्चितता न सिर्फ राजनीतिक बल्कि सामाजिक और विकासात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गई है। आने वाले दिनों में सरकार और अदालत के फैसले इस पूरे मुद्दे की दिशा तय करेंगे।

written by:- Anjali Mishra

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