मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव और अटकलों के दौर से गुजरती दिख रही है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मसूद पेजेशकियान ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है, और इसके पीछे सरकार तथा सेना से जुड़े शक्तिशाली संगठन Islamic Revolutionary Guard Corps के बीच बढ़ते मतभेदों को वजह बताया जा रहा है।
हालांकि ईरानी सरकार और राष्ट्रपति कार्यालय ने इन सभी खबरों का स्पष्ट खंडन किया है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति अपने पद पर बने हुए हैं और सामान्य रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इस तरह यह मामला फिलहाल पुष्टि और अफवाह के बीच की स्थिति में बना हुआ है।
इसी बीच ईरान के भीतर सत्ता संतुलन और अमेरिका के साथ तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटकलें और तेज हो गई हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सरकार और सुरक्षा संस्थानों के बीच किसी तरह का टकराव बढ़ता है, तो उसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर यादोल्लाह जावानी, जो IRGC के वरिष्ठ अधिकारी हैं, ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान के विरोधियों ने उसकी ताकत और संकल्प का गलत आकलन किया है। उनके अनुसार, तमाम दबावों और प्रतिबंधों के बावजूद ईरान पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान पर सैन्य दबाव और हमलों के जरिए उसे कमजोर करने की कोशिश की गई, लेकिन देश ने हर चुनौती का मजबूती से सामना किया है। उनके बयान को ईरान की कड़े रुख वाली विदेश नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका और Iran के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में किसी भी आंतरिक राजनीतिक बदलाव या अस्थिरता की खबरें वैश्विक कूटनीति पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर ये राजनीतिक मतभेद गहराते हैं, तो यह न सिर्फ ईरान के अंदर सत्ता संरचना को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक संतुलन को भी बदल सकते हैं।
फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और आधिकारिक खंडन के कारण इसे सिर्फ अटकलों के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन एक बात तय है कि ईरान की राजनीति और सुरक्षा तंत्र पर दुनिया की नजरें फिलहाल बेहद सतर्क हो गई हैं।
written by:- Anjali Mishra
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