उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देर रात महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शहर के कई प्रमुख इलाकों से सड़क पर हुड़दंग, छेड़छाड़ और महिलाओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं। विभूतिखंड, गोमतीनगर, हजरतगंज और आसपास के क्षेत्रों में लगातार मिल रही शिकायतों ने आम लोगों, खासकर महिलाओं और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी होने के बावजूद यदि महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर खुद को असुरक्षित महसूस करें, तो यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है।
ताजा मामला 28 और 29 जून की दरम्यानी रात का बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हजरतगंज के पास एक युवती रैपिडो ऑटो से अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। इसी दौरान कुछ युवकों ने कथित तौर पर ऑटो को रोक लिया और युवती को परेशान करने लगे। घटना की सूचना मिलते ही यूपी-112 पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल कार्रवाई करते हुए एक युवक को हिरासत में ले लिया। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। शहर के व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में यदि इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि देर रात गश्त, निगरानी और पुलिस की मौजूदगी कितनी प्रभावी है। राजधानी की सड़कों पर सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना कानून-व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है।
पिछले कुछ समय से विभूतिखंड, गोमतीनगर, हजरतगंज और अन्य इलाकों से भी सड़क पर हुड़दंग, तेज रफ्तार वाहन चलाने, महिलाओं का पीछा करने और कथित अभद्र व्यवहार की शिकायतें सामने आती रही हैं। हर घटना के बाद पुलिस कार्रवाई भी करती है, लेकिन ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति यह संकेत देती है कि केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि प्रभावी रोकथाम की भी आवश्यकता है।
महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस का विषय नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी महिला के साथ अभद्र व्यवहार या छेड़छाड़ जैसी घटनाएं कानून का उल्लंघन होने के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ लोगों में कानून का सम्मान और महिलाओं के प्रति जिम्मेदार व्यवहार की भावना विकसित करना भी जरूरी है।
इस घटना में फिलहाल एक युवक को हिरासत में लिया गया है, लेकिन मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना में और कौन-कौन शामिल था, पूरी घटना कैसे हुई और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज व अन्य साक्ष्यों से क्या जानकारी सामने आती है। जांच पूरी होने के बाद ही पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आएगी।
ऐसे मामलों में यह भी जरूरी है कि किसी भी आरोपी की जिम्मेदारी या दोष का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जाए। वहीं यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होना आवश्यक है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि महिलाओं की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फिलहाल राजधानी लखनऊ में सामने आई यह घटना महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चर्चा का विषय बन गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि राजधानी की सड़कों पर भी महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी, तो आम नागरिकों का कानून-व्यवस्था पर भरोसा कैसे मजबूत होगा। लोगों की अपेक्षा यही है कि कानून का डर सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि सड़कों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे और हर महिला बिना किसी भय के दिन हो या रात, सुरक्षित होकर अपने गंतव्य तक पहुंच सके।
written by:- Anjali Mishra
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