भारत में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य बनकर सामने आया है, जहां लोगों की औसत उम्र देश में सबसे कम दर्ज की गई है। आरबीआई की सांख्यिकी पुस्तिका में सामने आए ये आंकड़े सिर्फ एक संख्या नहीं हैं, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था, जीवनशैली और सामाजिक हालातों की गहरी तस्वीर पेश करते हैं। जहां देश के कई राज्य लंबी उम्र की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ इस पैमाने पर काफी पीछे नजर आ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में औसत लाइफ एक्सपेक्टेंसी महज 65.3 साल है। इसमें पुरुषों की औसत उम्र 63.7 साल और महिलाओं की 66.9 साल दर्ज की गई है। यानी यहां लोग देश के अन्य राज्यों की तुलना में औसतन साढ़े चार साल कम जीवन जी रहे हैं। यह अंतर अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर ऐसा क्या है, जो यहां के लोगों की उम्र को इतना प्रभावित कर रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच, ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में इलाज की कमी और समय पर मेडिकल सुविधाएं न मिल पाना इसकी बड़ी वजह हो सकती है। कई क्षेत्रों में आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति कमजोर है, जिससे छोटी बीमारियां भी गंभीर रूप ले लेती हैं और जीवन पर असर डालती हैं।
इसके साथ ही पोषण की समस्या भी इस तस्वीर को और गहरा बनाती है। राज्य के कई इलाकों में कुपोषण, एनीमिया और बच्चों व महिलाओं में पोषक तत्वों की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। कमजोर पोषण सीधे तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है, जिसका असर उम्र पर पड़ता है।
जीवनशैली से जुड़े कारक भी छत्तीसगढ़ की कम औसत उम्र के पीछे अहम भूमिका निभाते हैं। तंबाकू, बीड़ी और शराब का अधिक सेवन, शारीरिक श्रम के बावजूद संतुलित आहार की कमी और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही लोगों को समय से पहले बीमार बना रही है। खासकर पुरुषों में कम उम्र दर्ज होने की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है।
अगर दूसरी ओर नजर डालें तो केरल की तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई देती है। वहां लोगों की औसत उम्र 75 साल तक पहुंच चुकी है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, उच्च साक्षरता दर, संतुलित खानपान और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी आदतें केरल को लंबी उम्र के मामले में देश में आगे रखती हैं। यह अंतर साफ बताता है कि सही नीतियां और जागरूकता उम्र बढ़ाने में कितना बड़ा रोल निभाती हैं।
छत्तीसगढ़ और केरल के बीच यह लगभग दस साल का फासला केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सोच और सिस्टम का अंतर भी दर्शाता है। जहां एक ओर केरल में स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाती है, वहीं छत्तीसगढ़ में अभी भी कई बुनियादी चुनौतियां जस की तस बनी हुई हैं।
इन आंकड़ों ने नीति निर्माताओं और सरकार के सामने भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, पोषण कार्यक्रमों को मजबूत करना और लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में कम औसत उम्र के ये आंकड़े एक चेतावनी हैं। यह सिर्फ सरकार के लिए नहीं, बल्कि समाज और हर व्यक्ति के लिए सोचने का मौका है कि अगर आज स्वास्थ्य और जीवनशैली पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
written by :- Anjali Mishra
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
