मध्य पूर्व में बड़ा संघर्ष गहराने की आशंका तब बढ़ गई जब रविवार सुबह अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु संवर्धन केंद्रों—फोर्डो, नतांज और इस्फहान—पर बंकर बस्टर बमों और टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि इन तीनों स्थलों को ‘तबाह कर दिया गया है’।
इस हमले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता देखने को मिली। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने बयान जारी कर कहा कि “अब तक किसी भी प्रकार की ऑफ-साइट रेडिएशन में वृद्धि नहीं पाई गई है।” IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की आपातकालीन बैठक बुलाने की घोषणा की है।
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इस हमले के चलते इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध की आशंका तेज हो गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की लहर दौड़ पड़ी है। विभिन्न देशों ने कूटनीतिक समाधान पर जोर देते हुए संयम बरतने की अपील की है। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने स्पष्ट किया कि उनका देश किसी क्षेत्रीय संघर्ष में नहीं उलझना चाहता। उन्होंने कहा, “हमारे लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय हित जरूरी है और लेबनान को इस संघर्ष से दूर रहना चाहिए।”
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी अमेरिका के हमले पर गहरी चिंता जताते हुए चेताया कि “यह संघर्ष तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकता है, जिसके नागरिकों, क्षेत्र और पूरी दुनिया पर विनाशकारी प्रभाव हो सकते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि “इस स्थिति का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता, केवल कूटनीति ही रास्ता है।”
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