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मानसून सत्र में विपक्ष का हंगामेदार प्लान: राहुल गांधी की अगुवाई में सरकार पर होगा कड़ा प्रहार

संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने के लिए कमर कस ली है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष ने सात प्रमुख मुद्दों को चिह्नित किया है, जिन पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की रणनीति तैयार की गई है। यह सत्र 21 अगस्त तक चलेगा और तीखी बहसों का गवाह बनने की संभावना है।

विपक्ष के प्रमुख मुद्दे
शनिवार को ‘इंडिया’ गठबंधन की ऑनलाइन बैठक में 24 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में तय किए गए
प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं:
पहलगाम आतंकी हमला: विपक्ष ने पहलगाम हमले को खुफिया तंत्र की विफलता करार दिया है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमलावर आतंकियों को अब तक पकड़ा नहीं गया, जो सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी को दर्शाता है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री से जवाब मांगने की बात कही है।

ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर विवाद: विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर को अचानक रोकने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता के दावों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने पूछा, “ट्रंप 23 बार मध्यस्थता की बात कर चुके हैं, लेकिन हमारे पीएम चुप क्यों हैं?”

बिहार में SIR और मतदाता सूची विवाद: बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने इसे “मताधिकार छीनने की साजिश” करार देते हुए संविधान विरोधी ताकतों को बेनकाब करने की बात कही है।

जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को जोर-शोर से उठाएंगे।

महिलाओं और दलितों पर अत्याचार: मणिपुर, उत्तर प्रदेश, और ओडिशा जैसे राज्यों में महिलाओं और अनुसूचित जातियों पर बढ़ते अत्याचारों पर सरकार की चुप्पी को विपक्ष मुद्दा बनाएगा।
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अहमदाबाद विमान हादसा: 12 जून को हुए एयर इंडिया विमान हादसे में 241 लोगों की मौत के बाद जांच में पारदर्शिता की कमी को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा।
आर्थिक संकट और बेरोजगारी: महंगाई, किसानों की समस्याएं, और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार को घेरेगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 2014 में 2 करोड़ नौकरियों का वादा “हवा-हवाई” साबित हुआ।
राहुल गांधी की रणनीति: एकजुट विपक्ष, कड़े सवाल
राहुल गांधी ने विपक्षी एकता पर जोर देते हुए कहा कि बिखराव का फायदा सत्ता पक्ष उठा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी मुद्दों की प्राथमिकता तय कर एकजुट रणनीति अपनाई जाए। बैठक में राहुल ने कहा, “हमें सरकार से सवाल पूछने हैं और प्रधानमंत्री से जवाब लेना है।” उनकी रणनीति में संसद के दोनों सदनों में समन्वित हमला और जनहित के मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कहा कि सहमति वाले मुद्दों को दोनों सदनों में मिलकर उठाया जाएगा ताकि सरकार पर दबाव बने। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस की रणनीति समूह की बैठक में भी इन मुद्दों को अंतिम रूप दिया गया।
सरकार पर कड़ा प्रहार
विपक्ष ने सरकार पर “लोकतंत्र को कमजोर करने” का आरोप लगाया है। प्रमोद तिवारी ने कहा, “चुनाव आयोग SIR के जरिए NRC लागू करने की कोशिश कर रहा है, और ED विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने का हथियार बन गया है।” तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने भी पेगासस जासूसी का मुद्दा उठाया, जिसे विपक्ष संसद में गूंजाने की तैयारी में है।
सत्र में हंगामे के आसार
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सूत्रों का कहना है कि सरकार आठ नए विधेयकों को पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष इन मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के गठबंधन से अलग होने के बावजूद, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दल विपक्ष की रणनीति का हिस्सा हैं।
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “महाराष्ट्र में जनादेश छीना, अब बिहार में मताधिकार छीनने की कोशिश। हम संविधान विरोधी ताकतों को बेनकाब करेंगे।” यह बयान उनकी आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।
निष्कर्ष
मानसून सत्र में राहुल गांधी और विपक्ष की रणनीति सरकार को कठघरे में खड़ा करने और जनता के मुद्दों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। पहलगाम हमले से लेकर बिहार के SIR तक, विपक्ष का हर मुद्दा सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। सत्र के दौरान तीखी बहस और टकराव की पूरी संभावना है, और राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।

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