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वॉर ड्रामा फिल्मों का दौर, जंग से आगे इंसानियत की कहानी कहता सिनेमा

सिनेमाघरों में इन दिनों वॉर ड्रामा फिल्मों की जबरदस्त धूम देखने को मिल रही है और दर्शकों का रुझान इस जॉनर की ओर लगातार बढ़ता जा रहा है। देशभक्ति, बलिदान और भावनाओं से भरी कहानियां बड़े पर्दे पर लोगों को आकर्षित कर रही हैं। इसी कड़ी में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा की फिल्म ‘इक्कीस’ को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

1 जनवरी 2026 को रिलीज हुई ‘इक्कीस’ ने शुरुआत से ही दर्शकों का ध्यान खींचा है। फिल्म में अगस्त्य नंदा के साथ सिमर भाटिया और दिवंगत धर्मेंद्र अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह फिल्म न सिर्फ युद्ध के दृश्य दिखाती है, बल्कि एक सैनिक और उसके परिवार के भावनात्मक संघर्ष को भी दर्शाती है, जिससे दर्शक खुद को कहानी से जुड़ा महसूस कर रहे हैं।

फिल्म की तारीफ इसकी संवेदनशील कहानी और दमदार अभिनय के लिए की जा रही है। खासकर धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म होने के चलते ‘इक्कीस’ दर्शकों के लिए भावनात्मक रूप से और भी खास बन गई है। युवा दर्शकों से लेकर वरिष्ठ दर्शकों तक, सभी वर्ग इस फिल्म को देखने सिनेमाघरों तक पहुंच रहे हैं।

‘इक्कीस’ की सफलता के बाद अब दर्शकों की नजरें अगली बड़ी वॉर ड्रामा फिल्म ‘बॉर्डर 2’ पर टिकी हुई हैं। 1997 की ऐतिहासिक फिल्म ‘बॉर्डर’ की विरासत को आगे बढ़ाने वाली यह फिल्म भी देशभक्ति और सैनिकों के जज्बे को नए अंदाज में पेश करने वाली है। इसके ऐलान के बाद से ही फैंस में इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

इसी बीच वॉर ड्रामा फिल्मों की कतार में एक और नई फिल्म का ऐलान किया गया है, जिसका नाम है ‘इंडिया–पाकिस्तान: द फाइनल रेजोल्यूशन’। इस फिल्म को लेकर मेकर्स का दावा है कि यह पारंपरिक जंग वाली कहानी से हटकर होगी और इसमें गोलियों से ज्यादा भावनाओं की आवाज सुनाई देगी।

मेकर्स के अनुसार यह फिल्म युद्ध के मैदान की बजाय सीमा के दोनों ओर रहने वाले आम लोगों की जिंदगी, उनके दर्द और मानवीय रिश्तों को केंद्र में रखेगी। इसमें दिखाया जाएगा कि राजनीतिक फैसलों और संघर्षों का असर आम लोगों के जीवन पर कैसे पड़ता है और किस तरह इंसानियत की भावना हर हाल में जिंदा रहती है।

इस तरह की फिल्मों से साफ संकेत मिल रहा है कि अब सिनेमा केवल दुश्मन और जीत-हार की कहानी तक सीमित नहीं रहना चाहता। दर्शक भी ऐसी कहानियां देखना चाहते हैं, जो उन्हें सोचने पर मजबूर करें और भावनात्मक रूप से जोड़ें। यही वजह है कि वॉर ड्रामा फिल्मों का स्वरूप धीरे-धीरे बदल रहा है।

वर्तमान समय में जब दुनिया तनाव और संघर्षों से गुजर रही है, ऐसे में सिनेमा समाज को एक अलग नजरिया दिखाने का माध्यम बन रहा है। ‘इक्कीस’, ‘बॉर्डर 2’ और ‘इंडिया–पाकिस्तान: द फाइनल रेजोल्यूशन’ जैसी फिल्में इसी बदलाव की ओर इशारा करती हैं।

कुल मिलाकर, सिनेमाघरों में चल रहा यह वॉर ड्रामा का दौर सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं सुना रहा, बल्कि उसके पीछे छिपे इंसानी जज्बात, रिश्ते और उम्मीदों को भी सामने ला रहा है। यही वजह है कि दर्शक इन फिल्मों से जुड़ रहे हैं और यह जॉनर एक बार फिर सिनेमा की सबसे मजबूत धारा बनता जा रहा है।

written by:- Anjali Mishra

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