देश की आर्थिक राजधानी Mumbai के सामने एक बड़ा जल संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। मुंबई को पेयजल उपलब्ध कराने वाली सात प्रमुख झीलों का जलस्तर तेजी से घट रहा है और ताजा आंकड़ों के अनुसार इनमें अब केवल 9.34 प्रतिशत उपयोगी पानी बचा है। बताया जा रहा है कि यह स्तर पिछले तीन वर्षों में सबसे कम है, जिससे प्रशासन और नागरिकों दोनों की चिंता बढ़ गई है।
मुंबई की जल आपूर्ति मुख्य रूप से सात जलाशयों पर निर्भर करती है। हर साल मानसून के दौरान इन झीलों में पर्याप्त पानी जमा होता है, जिससे पूरे वर्ष शहर की जरूरतें पूरी की जाती हैं। लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने और अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण जलाशयों में पर्याप्त जल संग्रह नहीं हो सका है।
सबसे ज्यादा चिंता Upper Vaitarna Dam को लेकर जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस जलाशय का उपयोगी पानी लगभग समाप्त हो चुका है। वहीं Tansa Lake में भी बहुत कम पानी शेष बताया जा रहा है। ये दोनों जल स्रोत मुंबई की जल आपूर्ति व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। शहर की आबादी करोड़ों में है और प्रतिदिन भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में जलाशयों का लगातार घटता स्तर भविष्य में जल कटौती जैसी परिस्थितियां पैदा कर सकता है।
सैटेलाइट तस्वीरों में भी झीलों के सिकुड़ने के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। जलाशयों के किनारों पर सूखी भूमि का क्षेत्र बढ़ता नजर आ रहा है, जो जल भंडारण में आई कमी को दर्शाता है। इन तस्वीरों ने जल संकट की आशंका को और गंभीर बना दिया है।
मुंबई में पहले भी कम बारिश के कारण जल संकट की स्थितियां बन चुकी हैं, जिसके चलते प्रशासन को पानी की कटौती और वैकल्पिक प्रबंधन के उपाय अपनाने पड़े थे। इस बार भी यदि मानसून सामान्य स्तर तक नहीं पहुंचता है, तो ऐसे कदमों की आवश्यकता पड़ सकती है।
जल विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मानसून पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक जल संरक्षण योजनाओं को और मजबूत करने की जरूरत है। वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण और रिसाव रोकने जैसी व्यवस्थाएं भविष्य में ऐसे संकटों को कम करने में मदद कर सकती हैं।
फिलहाल मुंबईवासियों की निगाहें मानसून पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द ही अच्छी बारिश होती है तो झीलों का जलस्तर सुधर सकता है, लेकिन यदि बारिश में और देरी हुई तो शहर को आने वाले महीनों में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
मुंबई की जीवनरेखा मानी जाने वाली इन झीलों में घटता जलस्तर केवल एक मौसमी समस्या नहीं बल्कि जल प्रबंधन की बड़ी चुनौती का संकेत भी है। अब देखना होगा कि मानसून कितनी राहत देता है और प्रशासन संभावित संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।
written by:- Anjali Mishra
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