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मंत्री की गाड़ी के आगे धरने पर बैठे किसान! आगरा में भूपेंद्र चौधरी का काफिला रुका, फसल के दाम पर फूटा गुस्स|

उत्तर प्रदेश के आगरा में उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई जब सैकड़ों किसानों ने प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री Bhupendra Singh Chaudhary की गाड़ी को घेर लिया। किसान मंत्री के काफिले के सामने धरने पर बैठ गए और अपनी समस्याओं को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर किसानों की आय, फसल मूल्य और कृषि नीतियों को लेकर चल रही बहस को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

बताया जा रहा है कि मंत्री भूपेंद्र चौधरी आगरा में एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम Krishi Vigyan Kendra से जुड़ा था, लेकिन कार्यक्रम स्थल के बाहर बड़ी संख्या में किसान पहले से मौजूद थे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। जैसे ही मंत्री का काफिला वहां पहुंचा, किसानों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया।

प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना था कि आगरा आलू उत्पादन के मामले में देश के प्रमुख जिलों में गिना जाता है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उनका आरोप था कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बाजार में फसल के दाम किसानों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं मिल पा रहे हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

स्थिति ऐसी बन गई कि मंत्री का काफिला कुछ समय के लिए वहीं रुक गया। किसानों ने गाड़ी के आगे बैठकर अपनी नाराजगी जाहिर की और सीधे मंत्री से बातचीत की मांग की। मौके पर मौजूद अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी बात सीधे मंत्री तक पहुंचाने पर अड़े रहे।

काफी देर तक चले गतिरोध के बाद मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने गाड़ी में बैठे-बैठे ही किसानों की समस्याएं सुनीं। किसानों ने आलू की कीमत, विपणन व्यवस्था और कृषि से जुड़ी अन्य समस्याओं को उनके सामने रखा। मंत्री ने उनकी बातों को ध्यान से सुनने और संबंधित मुद्दों पर विचार करने का आश्वासन दिया।

किसानों और मंत्री के बीच बातचीत के बाद माहौल कुछ शांत हुआ और फिर काफिले को आगे बढ़ने की अनुमति मिल सकी। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत जरूर दिया कि कृषि उत्पादों के दाम और किसानों की आय से जुड़े मुद्दे अभी भी जमीनी स्तर पर बड़ी चिंता बने हुए हैं।

राजनीतिक दृष्टि से भी इस घटना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब किसानों का विरोध केवल ज्ञापन या पारंपरिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है। कई जगहों पर किसान सीधे जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के सामने अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं, जिससे सरकार पर समस्याओं के समाधान का दबाव बढ़ रहा है।

फिलहाल आगरा की यह घटना किसानों की आर्थिक चुनौतियों और फसल के उचित मूल्य की मांग को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में ले आई है। अब देखना होगा कि किसानों की शिकायतों पर सरकार क्या कदम उठाती है और क्या कृषि उत्पादों के मूल्य को लेकर कोई ठोस राहत सामने आती है।

written by:- Anjali Mishra

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