मध्य-पूर्व में हालात एक बार फिर बेहद संवेदनशील होते दिखाई दे रहे हैं। Strait of Hormuz के पास और बंदर अब्बास क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस टकराव ने एक बार फिर कूटनीतिक कोशिशों और संभावित सीजफायर पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों के बाद ईरान ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। साथ ही ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है।
दूसरी ओर, अमेरिका की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने होर्मुज के पास ईरानी नौकाओं और एक मिसाइल साइट को निशाना बनाया है। इससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच टकराव अब जमीन और समुद्री दोनों मोर्चों पर फैलता जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei का कड़ा बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होगी। इस बयान ने तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है और क्षेत्रीय स्थिति को और जटिल बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे घटनाक्रम पहले से चल रही शांति वार्ताओं और संभावित सीजफायर प्रयासों पर गंभीर असर डाल सकते हैं। यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका प्रभाव केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी दिखाई दे सकता है।
Bander Abbas जैसे रणनीतिक क्षेत्रों की वजह से यह पूरा इलाका पहले से ही भू-राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुरंत प्रतिक्रिया पैदा करती है।
फिलहाल स्थिति बेहद अस्थिर बनी हुई है और दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति के जरिए इस टकराव को रोका जा सकेगा या यह तनाव आगे और बढ़कर बड़े संकट का रूप ले लेगा।
written by:- Anjali Mishra
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