देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा मानी जाने वाली UPSC Civil Services Examination एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। 24 मई को आयोजित प्रीलिम्स परीक्षा के बाद लाखों अभ्यर्थियों ने पेपर के पैटर्न और कठिनाई स्तर को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस बार परीक्षा को लेकर असंतोष सोशल मीडिया से लेकर छात्र मंचों तक साफ दिखाई दे रहा है।
करीब 5.5 लाख अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था, और अब एक बड़े वर्ग का कहना है कि इस बार प्रश्नपत्र का स्तर अपेक्षा से अलग और असंतुलित रहा। कई छात्रों का आरोप है कि परीक्षा का पैटर्न इस बार चौंकाने वाला था, जिससे तैयारी के बावजूद कई उम्मीदवार असहज महसूस कर रहे थे।
सबसे बड़ा विवाद पेपर के हिंदी अनुवाद को लेकर सामने आया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई प्रश्नों का अनुवाद अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला था, जिससे हिंदी माध्यम के छात्रों को अतिरिक्त कठिनाई का सामना करना पड़ा। इसी वजह से परीक्षा की निष्पक्षता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
इसके अलावा CSAT पेपर को भी लेकर नाराजगी जताई जा रही है। छात्रों का आरोप है कि यह पेपर सामान्य स्तर से काफी कठिन था, जिससे कई अभ्यर्थियों के लिए कट-ऑफ तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार बहस चल रही है। कई अभ्यर्थी इसे “असंतुलित पेपर” बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि परीक्षा का स्तर लगातार कठिन होता जा रहा है, जो प्रतियोगिता की प्रकृति का हिस्सा है।
छात्रों की मांग है कि परीक्षा पैटर्न और अनुवाद की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए ताकि भविष्य में किसी भी माध्यम के अभ्यर्थियों के साथ असमानता महसूस न हो। कई जगहों पर संगठित रूप से विरोध और चर्चा भी देखने को मिल रही है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि Union Public Service Commission इस पूरे मामले पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या अभ्यर्थियों की शिकायतों को लेकर कोई स्पष्टीकरण या कदम उठाया जाता है।
फिलहाल यह मुद्दा देश की सबसे बड़ी परीक्षा की पारदर्शिता, संतुलन और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है, जिसका असर आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।
written by:- Anjali Mishra
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