उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक निगरानी और विकास कार्यों को तेज करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत मंत्रियों को अलग-अलग जिलों का प्रभार सौंपकर योजनाओं की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।
सुरेश खन्ना को लखनऊ और वाराणसी जिलों का प्रभार दिया गया है। वहीं सूर्य प्रताप शाही को अयोध्या और बस्ती की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा स्वतंत्र देव सिंह को प्रयागराज और गोरखपुर जिलों का प्रभार दिया गया है।
सरकार की इस नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के पास 25-25 जिलों की जिम्मेदारी होगी। इसका उद्देश्य प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाना बताया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि इस कदम से जिलों में चल रही विकास योजनाओं की नियमित निगरानी हो सकेगी और किसी भी तरह की लापरवाही या देरी पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी। साथ ही केंद्र और राज्य की योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर शासन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जहां मंत्री सीधे जिलों की प्रगति पर नजर रखेंगे और समय-समय पर समीक्षा करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रभार प्रणाली से निर्णय लेने की गति बढ़ सकती है और स्थानीय समस्याओं का समाधान भी तेजी से हो सकता है।
फिलहाल सरकार की इस नई रणनीति पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर है कि यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और इसका वास्तविक असर जिलों के विकास कार्यों पर कितना दिखाई देता है।
written by:- Anjali Mishra
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