अयोध्या में राम मंदिर के दानपात्रों की रकम में कथित गबन के आरोपों को लेकर माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) के गठन के बाद अब जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है और सूत्रों के हवाले से कई नई जानकारियां सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अब तक जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। इसके बावजूद जिस तरह से जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों की पड़ताल में जुटी हैं, उससे मामला काफी गंभीर माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि कथित अनियमितता किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकती। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो इसके पीछे कई लोगों का एक संगठित नेटवर्क काम कर सकता है। दावा किया जा रहा है कि कथित तौर पर कुछ लोगों की भूमिकाएं पहले से तय थीं—कौन रकम निकालेगा, कौन उसे सुरक्षित रखेगा, कौन आगे पहुंचाएगा और आखिर में उसका बंटवारा किस तरह होगा। हालांकि इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां अब संदिग्ध कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों के बैंक खातों की पड़ताल कर रही हैं। हाल के वर्षों में हुई संपत्ति खरीद, नकद लेनदेन, निवेश और परिवार के सदस्यों के वित्तीय रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लाए जा रहे हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति तो नहीं बनाई गई और यदि बनाई गई है तो उसका स्रोत क्या है।
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि अयोध्या के कौशलपुरी क्षेत्र में किसी गोपनीय स्थान पर कथित तौर पर रकम का बंटवारा किया जाता था। आरोप यह भी है कि दानपात्र से रकम एक बार में नहीं बल्कि धीरे-धीरे निकाली जाती थी ताकि किसी को तत्काल संदेह न हो। हालांकि इन सभी दावों की पुष्टि अभी जांच एजेंसियों द्वारा आधिकारिक रूप से नहीं की गई है और यही वजह है कि पूरे मामले पर अंतिम निष्कर्ष निकालना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
इसी बीच SIT जांच शुरू होने से पहले ट्रस्ट और उससे जुड़े लोगों के इर्द-गिर्द हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai की तबीयत खराब बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि उन्हें जुकाम और शुगर बढ़ने की शिकायत है। हालांकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर ट्रस्ट की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
दूसरी तरफ ट्रस्टी Anil Mishra के भी अयोध्या से बाहर होने और इलाज के सिलसिले में कहीं अन्य स्थान पर जाने की जानकारी सामने आई है। इन घटनाक्रमों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, हालांकि बीमारी और जांच को सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा जब तक कोई ठोस तथ्य सामने न आ जाए।
मामले में सबसे तीखी प्रतिक्रिया पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता Vinay Katiyar की ओर से आई है। उन्होंने कथित तौर पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे स्वयं मौके पर पहुंचकर “चोरों को भगाएंगे”, अन्यथा दोषियों को जेल जाना पड़ेगा। उनके इस बयान के बाद माहौल और गर्म हो गया है। वहीं Vishwa Hindu Parishad की ओर से भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जांच की बात कही गई है, जबकि कटियार अपने बयान पर कायम बताए जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि SIT की टीम अयोध्या पहुंचने की तैयारी में है और जल्द ही जांच की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच की दिशा क्या होगी, किन लोगों से पूछताछ की जाएगी और क्या ट्रस्ट से जुड़े बड़े पदाधिकारियों को भी जांच एजेंसियों के सामने पेश होना पड़ेगा। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
फिलहाल पूरा देश इस जांच पर नजर बनाए हुए है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है। अब सबकी निगाहें SIT की कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यही जांच तय करेगी कि आरोपों के पीछे कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में कोई संगठित वित्तीय गड़बड़ी हुई है या नहीं।
written by:- Anjali Mishra
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