पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठा दिया है जिसने दिल्ली से वॉशिंगटन और मॉस्को तक राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। भारत ने अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के 24 SS-60R सीहॉक हेलिकॉप्टरों के लिए 94.6 करोड़ डॉलर का मेगा पैकेज साइन किया है, और यह सौदा भारतीय नौसेना की ताकत में जबरदस्त इज़ाफ़ा करने वाला माना जा रहा है। दुनिया के सबसे बेहतरीन समुद्री युद्धक हेलिकॉप्टरों में शामिल Seahawk न सिर्फ सबमरीन हंटिंग, जासूसी और समुद्री सुरक्षा में नंबर वन माने जाते हैं, बल्कि इनकी तकनीक और मारक क्षमता भारत के समुद्री मोर्चे पर गेमचेंजर साबित होगी। अमेरिका ने भी इस सौदे को “भारत–अमेरिका रक्षा साझेदारी की नई ऊँचाई” बताया है, जिससे साफ है कि दोनों देशों के बीच मिलिट्री बॉन्ड पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होते दिख रहे हैं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह घोषणा ठीक उसी समय आई है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ रहे हैं और गुरुवार को वे पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। ऐसे में अमेरिका द्वारा रक्षा सौदे की यह टाइमिंग राजनीति और कूटनीति दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। कई विशेषज्ञ इसे एक सॉफ्ट मैसेज मान रहे हैं कि अमेरिका भारत को इंडो–पैसिफिक में अपनी बड़ी रणनीति का अहम पार्टनर बनाकर देख रहा है, और इसी कारण डिफेंस सेक्टर में लगातार बड़े सौदे सामने आ रहे हैं। वहीं मॉस्को के साथ भारत के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, इसलिए पुतिन की यह यात्रा भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत जिस तरह एक तरफ अमेरिका के साथ आधुनिक रक्षा तकनीक बढ़ा रहा है और दूसरी तरफ रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है, वह उसकी स्वतंत्र और बहु–ध्रुवीय विदेश नीति की झलक दिखाता है। Seahawk हेलिकॉप्टर आने के बाद भारतीय नौसेना का एंटी–सबमरीन वॉरफेयर पूरी तरह बदल जाएगा। चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों और हिंद महासागर में उसकी उपस्थिति को देखते हुए यह सौदा भारत के maritime security architecture को और भी मजबूत करने वाला है। भारत अब समुद्र की गहराइयों से लेकर हवा तक दुश्मन की हर हरकत पर ज्यादा तेज़ नजर रख सकेगा।
इस सौदे ने भारत की रणनीतिक छवि को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदल दिया है। अमेरिका की ओर से साफ संकेत है कि वह भारत को सिर्फ साझेदार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के केंद्रीय खिलाड़ी के रूप में देख रहा है। उधर, पुतिन की यात्रा से भी कई बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है खासकर ऊर्जा, रक्षा और आर्कटिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर। रूस के साथ भारत के रिश्ते पारंपरिक रूप से बेहद गहरे रहे हैं, और पुतिन की यह मुलाकात उन रिश्तों में नई ऊर्जा भर सकती है।
कूटनीति के जानकार मानते हैं कि यह हफ्ता भारत की विदेश नीति के लिए बेहद अहम है एक तरफ अमेरिकी तकनीक का बड़ा सौदा, दूसरी तरफ रूसी राष्ट्राध्यक्ष की उच्चस्तरीय यात्रा। दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि भारत आज अपनी शर्तों पर दुनिया की महाशक्तियों के साथ संबंध बना रहा है, और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत बन रही है। इसके अलावा भारत अपने रक्षा मोर्चे को अत्याधुनिक स्तर पर ले जाने की दिशा में निरंतर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अब सबकी नज़र इस बात पर टिक गई है कि पुतिन और मोदी की मुलाकात से कौन–सी घोषणाएं सामने आती हैं और यह पूरी कूटनीतिक तस्वीर को कैसे बदलती हैं। भारत की दो महाशक्तियों के साथ एक ही समय पर बढ़ती नज़दीकियाँ बताती हैं कि आने वाले महीनों में एशिया की रणनीतिक राजनीति और दिलचस्प होने वाली है। और यही वजह है कि आज एक ही सवाल हवा में है क्या भारत दुनिया के नए power–broker की भूमिका में आ रहा है?
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