देश में परीक्षा प्रणाली को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। National Eligibility cum Entrance Test को लेकर उठे सवालों के बाद अब Central Board of Secondary Education के रिजल्ट और डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया पर नई बहस शुरू हो गई है। इस मुद्दे ने छात्रों, अभिभावकों और राजनीतिक दलों के बीच चिंता और चर्चा दोनों को बढ़ा दिया है।
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि CBSE परीक्षा परिणामों में भारी गड़बड़ी हुई है। उनका कहना है कि इस वजह से लाखों छात्र और उनके माता-पिता मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में हैं।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तंज कसते हुए कहा, “न जवाब, न ज़िम्मेदारी, न शर्म।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है तथा शिक्षा व्यवस्था को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि मूल्यांकन में पारदर्शिता और संतुलन को लेकर उन्हें संदेह है, जबकि कई लोग तकनीकी त्रुटियों और परिणामों में असमानता की शिकायत कर रहे हैं।
हालांकि आधिकारिक स्तर पर इस मुद्दे पर क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या किसी व्यापक गड़बड़ी की पुष्टि होती है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है। शिक्षा से जुड़े मामलों में छात्रों का भविष्य सीधे जुड़ा होने की वजह से ऐसे विवाद तेजी से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डिजिटल सिस्टम पर बढ़ती निर्भरता के बीच परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा अब बड़ा रूप लेता दिख रहा है। विपक्ष इसे शिक्षा व्यवस्था की विफलता से जोड़कर सरकार पर हमला कर रहा है, जबकि सरकार और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
फिलहाल CBSE रिजल्ट विवाद ने देश में परीक्षा प्रणाली, डिजिटल मूल्यांकन और छात्रों के भविष्य को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जो आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
written by:- Anjali Mishra
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