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चीन पर AIMIM प्रमुख ओवैसी ने केंद्र सरकार से कड़े सवाल पूछे, राष्ट्रीय सुरक्षा पर जताई चिंता !

चीन के मुद्दे को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से सीधे और तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने चीन से हुए समझौतों, 2020 से पहले की गश्त व्यवस्था और बफर ज़ोन को लेकर स्पष्ट जवाब मांगे। ओवैसी ने कहा कि 2020 के बाद लद्दाख में चीन ने अपना ढांचा तेजी से बढ़ाया है और भारत की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से कार्य कर रहा है।

ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने चीन को पाकिस्तान को हथियार देने से रोकने में सफलता पाई है या नहीं। उनका आरोप है कि चीन के मामले में सरकार नरम रवैया अपना रही है और सीमा पर भारतीय सेना के हाथ बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

ओवैसी ने संसद की भूमिका पर भी सवाल उठाया और कहा कि संसद को ठीक से चलने दिया जाए। उनका कहना था कि इस बड़े राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे पर खुलकर सवाल किए जाने चाहिए और जनता को सटीक जानकारी मिलनी चाहिए।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण ओवैसी ने सरकार को घेरा। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन के बढ़ते प्रभाव और सीमा पर हो रही गतिविधियों के बारे में जनता और विपक्ष को पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि ओवैसी के सवाल केवल विपक्षी दबाव नहीं बल्कि देश की सुरक्षा के प्रति बढ़ती चिंता का प्रतीक हैं। यह मामला ना केवल विदेश नीति बल्कि रक्षा रणनीति और सीमा सुरक्षा की गंभीरता को भी उजागर करता है।

ओवैसी ने कहा कि 2020 के बाद लद्दाख में चीन की गतिविधियां तेज़ हुई हैं और भारतीय जवानों के लिए यह चुनौती और बढ़ गई है। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि भारत ने चीन को अपने आक्रामक कदमों से रोकने के लिए क्या रणनीति अपनाई है।

इस मुद्दे पर संसद में खुलकर चर्चा होने की जरूरत है, ताकि चीन और पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा खतरे पर सभी दलों के बीच समझ और रणनीति तैयार की जा सके। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि सिर्फ बयानबाज़ी या कूटनीति पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठोस कदम और जवाबदेही की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति ओवैसी की चिंता का संदेश स्पष्ट है: सीमा पर सक्रियता, चीन के बढ़ते प्रभुत्व और पाकिस्तान को हथियार सप्लाई को रोकना देश की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से कहा कि इस मामले पर किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। अब सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार ओवैसी के उठाए गए सवालों का संतोषजनक जवाब दे पाएगी और देश की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को और प्रभावी बनाएगी।

written by :- Anjali Mishra

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