अयोध्या के रामजन्मभूमि परिसर में 25 नवंबर को होने वाले ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां इस समय चरम पर हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और प्रशासनिक अमला मिलकर इस ऐतिहासिक अवसर को भव्य और अविस्मरणीय बनाने में जुटा है। पूरे परिसर को फूलों, पारंपरिक दीपों और रंगीन रोशनी से सजाने की तैयारी चल रही है। कारीगरों और कलाकारों की टीमें दिन-रात मेहनत कर रही हैं ताकि जब यह पवित्र आयोजन संपन्न हो, तो अयोध्या की धरती पर एक अद्भुत आध्यात्मिक आभा फैल जाए। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पूरे देश के लिए गर्व और श्रद्धा का क्षण बनने जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। अयोध्या को किले में तब्दील कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की संभावना न रहे। शहर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और ड्रोन से भी निगरानी रखी जाएगी। केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश की अनुमति होगी, जिनके पास विशेष कोड वाले आमंत्रण पत्र होंगे। ये कोड कार्ड आधुनिक सुरक्षा तकनीक से लैस हैं, जिससे किसी भी व्यक्ति की पहचान आसानी से सत्यापित की जा सकेगी। सुरक्षा एजेंसियों ने यह सुनिश्चित किया है कि आमंत्रित अतिथि बिना किसी असुविधा के समारोह में भाग ले सकें, वहीं आम जनता के लिए विशेष स्थानों पर बड़ी स्क्रीन लगाई जाएगी ताकि वे भी इस भव्य आयोजन के साक्षी बन सकें।
जानकारी के अनुसार, इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके आगमन को देखते हुए ट्रस्ट और प्रशासन ने तैयारियों में और तेजी ला दी है। प्रधानमंत्री के अलावा कई केंद्रीय मंत्री, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, संत-महंत और देशभर के प्रमुख धार्मिक नेता भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन राम मंदिर निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक बनेगा।
अयोध्या नगरी में इस समारोह को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है। शहर के बाजारों में रौनक लौट आई है, होटल और धर्मशालाएं पूरी तरह बुक हो चुकी हैं। स्थानीय कलाकार रामायण से जुड़ी झांकियों की तैयारी में जुटे हैं, जबकि महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में स्वागत गीतों की रिहर्सल कर रही हैं। हर ओर ‘जय श्रीराम’ के जयकारे गूंज रहे हैं और वातावरण में भक्ति और उत्साह की लहर दौड़ रही है। अयोध्या एक बार फिर भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जगमगाने को तैयार है, और 25 नवंबर का यह ध्वजारोहण समारोह इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज होने वाला है।
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