उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में रोजगार और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब सरकार शहरों की छोटी सड़कों पर भी उद्योग लगाने की अनुमति देने जा रही है। पहले यह अनुमति केवल ग्रामीण इलाकों में थी, जहां सात मीटर चौड़ी सड़कों पर छोटे उद्योग स्थापित किए जा सकते थे। लेकिन अब शहरी क्षेत्रों में भी इस मानक में बदलाव की तैयारी है। यह फैसला शहरी युवाओं और उद्यमियों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है, जिससे वे अपने ही शहर में छोटे-छोटे उद्योग स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर उच्च स्तर पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही इसे अधिसूचित किया जाएगा। योगी सरकार का उद्देश्य है कि छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को अधिक सुविधाजनक वातावरण मिल सके, ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार हो। सरकार का मानना है कि अगर छोटे उद्योगों को शहरों में स्थापित करने की अनुमति दी जाए, तो स्थानीय स्तर पर न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि माइग्रेशन की समस्या भी कम होगी। इससे आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विज़न को मजबूत आधार मिलेगा।
इस कदम से उद्योग विभाग को उम्मीद है कि हजारों नए उद्योगों का मार्ग प्रशस्त होगा। शहरों में छोटे पैमाने के कारखाने, वर्कशॉप, पैकेजिंग यूनिट, टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योगों को तेजी से बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, सरकार औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर भी विकास की नई राह खोल रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ेगा। नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों को इसके लिए नए दिशा-निर्देश तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सड़क की चौड़ाई, यातायात और पर्यावरण के मानकों का ध्यान रखते हुए अनुमति दी जा सके।
राज्य सरकार का यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “हर हाथ को काम, हर घर में रोजगार” के मिशन को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय शहरी बेरोजगार युवाओं, महिलाओं और स्टार्टअप उद्यमियों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। जहां पहले औद्योगिक नीतियों का दायरा सीमित था, वहीं अब यह पहल उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा औद्योगिक हब बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। सरकार को भरोसा है कि इस नीति से न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि राज्य की आर्थिक गति को भी नई उड़ान मिलेगी।
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