जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिवक्ता विशाल तिवारी ने इस संबंध में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्यों को पहाड़ी एवं दूरदराज के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सशस्त्र बल तैनात करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि 16 अप्रैल को पहलगाम की बायसरन घाटी में आतंकियों ने सेना की वर्दी पहनकर हिंदू पर्यटकों को पहचान कर उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिसमें 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई। मृतकों में अधिकांश पर्यटक थे, जिनमें दो विदेशी और दो स्थानीय नागरिक भी शामिल थे।इस भयावह घटना के बाद पहाड़ी इलाकों में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में पर्यटकों की सुरक्षा के लिए ठोस और सशस्त्र सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
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याचिका में यह भी मांग की गई है कि पर्यटन स्थलों—विशेष रूप से दूरदराज के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों—में तत्काल चिकित्सा सुविधाएं स्थापित की जाएं, ताकि आपात स्थिति में त्वरित इलाज संभव हो सके।
इसके साथ ही, याचिका में यह तर्क भी दिया गया है कि उत्तर भारत के कई राज्यों की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर आधारित है, और आतंकी घटनाएं इस क्षेत्र को आर्थिक रूप से गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। अतः पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना न केवल मानव जीवन की रक्षा के लिए, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी आवश्यक है।
विशाल तिवारी ने याचिका में अमरनाथ यात्रा जैसे धार्मिक पर्यटन कार्यक्रमों की विशेष सुरक्षा के लिए भी सुप्रीम कोर्ट से निर्देश देने की अपील की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पहलगाम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा की चूक नहीं होनी चाहिए, और केवल कड़े सुरक्षात्मक उपायों से ही ऐसे आतंकी हमलों को रोका जा सकता है।
