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गणतंत्र दिवस परेड में सियासी विवाद, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठने की व्यवस्था बनी मुद्दा !

देशभर में 26 जनवरी को 77वां गणतंत्र दिवस पूरे जोश, गर्व और देशभक्ति के साथ मनाया गया। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड में देश की सैन्य शक्ति, जवानों की परेड और सांस्कृतिक विविधता की झलक ने सभी का ध्यान खींचा। यह दिन सिर्फ देशभक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान के प्रति सम्मान का भी संदेश देता है।

हालांकि, इस बार परेड के दौरान एक सियासी विवाद भी सामने आया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को परेड में तीसरी पंक्ति में बैठाने पर कांग्रेस ने तीखी नाराजगी जताई। कांग्रेस ने इसे जानबूझकर किया गया अपमान बताया और आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्षी नेताओं को उचित सम्मान नहीं दिया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि गणतंत्र दिवस जैसी राष्ट्रीय परेड में वरिष्ठ विपक्षी नेताओं को सम्मान के अनुसार बैठाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और परंपराओं का हिस्सा है। उनके अनुसार, बैठने की यह व्यवस्था राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

दूसरी तरफ, रक्षा मंत्रालय ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज किया। मंत्रालय ने कहा कि बैठने की व्यवस्था पूरी तरह से प्रोटोकॉल के अनुसार थी और इसमें किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि परेड में सभी नेताओं को उनके पद और वरिष्ठता के अनुसार जगह दी गई थी।

इस मुद्दे ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच ताजा सियासी टकराव को जन्म दिया। सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर इस पर बहस तेज हो गई है। लोग परेड की भव्यता के साथ-साथ इस विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के विवाद राष्ट्रीय समारोहों में अक्सर देखने को मिलते हैं। हालांकि, यह गणतंत्र दिवस की गरिमा को प्रभावित कर सकता है, इसलिए राजनीतिक दलों को संयम और सम्मान के साथ इस मुद्दे को देखना चाहिए।

कुल मिलाकर, 77वें गणतंत्र दिवस ने देशवासियों को गर्व और उत्साह से भर दिया, लेकिन राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठने की व्यवस्था पर उठे सवाल ने सियासी माहौल को गरम कर दिया। यह विवाद दर्शाता है कि राष्ट्रीय समारोहों में राजनीति और परंपरा के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ और सम्मान दोनों ही जरूरी हैं, और हर सार्वजनिक अवसर पर सभी नेताओं के लिए उचित प्रोटोकॉल सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

written by :- Anjali Mishra

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