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रायबरेली में फिर सक्रिय राहुल गांधी, कांग्रेस की जड़ों को मजबूत करने की सियासी तैयारी !

कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर रायबरेली के दौरे पर आ रहे हैं और इस तीन दिन के कार्यक्रम को पार्टी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ रही रायबरेली में राहुल की मौजूदगी सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि जमीनी सियासत को फिर से धार देने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। उनका यह दौरा ऐसे वक्त हो रहा है, जब प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस अपनी खोई हुई पकड़ वापस पाने के लिए नए सिरे से रणनीति बना रही है।

राहुल गांधी कल लखनऊ से सड़क मार्ग के जरिए रायबरेली पहुंचेंगे और भुएमऊ गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम करेंगे। सड़क मार्ग से आना भी अपने आप में एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है, क्योंकि इससे कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से सीधे जुड़ने का मौका मिलता है। कांग्रेस नेतृत्व लगातार यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह सिर्फ मंच की राजनीति नहीं, बल्कि ज़मीनी संपर्क पर जोर दे रहा है।

20 जनवरी को राहुल गांधी का कार्यक्रम पूरी तरह जनसंपर्क और स्थानीय जुड़ाव पर केंद्रित रहेगा। वह एक क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करेंगे, जो युवाओं के साथ संवाद का जरिया माना जा रहा है। कांग्रेस की रणनीति में युवा मतदाता एक अहम कड़ी हैं और ऐसे आयोजनों के जरिए राहुल उन्हें सीधे संदेश देने की कोशिश करते नजर आते हैं।

इसके बाद राहुल नगर पालिका अध्यक्ष के घर जाकर मुलाकात करेंगे, जिसे स्थानीय राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। यह कदम साफ संकेत देता है कि कांग्रेस सिर्फ बड़े नेताओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि स्थानीय नेतृत्व को भी साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे संगठन के भीतर तालमेल मजबूत होने की उम्मीद की जा रही है।

राहुल गांधी ऊंचाहार के रोहनिया में मनरेगा चौपाल भी करेंगे, जहां रोजगार, ग्रामीण विकास और सरकार की योजनाओं पर चर्चा होगी। मनरेगा जैसे मुद्दे कांग्रेस की राजनीति का पुराना और मजबूत आधार रहे हैं। इस चौपाल के जरिए राहुल सीधे ग्रामीण जनता से संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनकर राजनीतिक संदेश को और धार देने की कोशिश करेंगे।

21 जनवरी को भुएमऊ गेस्ट हाउस में सीनियर नेताओं के साथ होने वाली बैठक इस दौरे का सबसे रणनीतिक हिस्सा मानी जा रही है। इस बैठक में संगठन, चुनावी तैयारियों और आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर गंभीर मंथन होने की संभावना है। माना जा रहा है कि यूपी में कांग्रेस की आगे की दिशा को लेकर यहां कुछ अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

रायबरेली कांग्रेस के लिए सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि भावनात्मक और राजनीतिक प्रतीक रही है। ऐसे में राहुल गांधी का बार-बार यहां आना यह दिखाता है कि पार्टी इस क्षेत्र को किसी भी हाल में कमजोर नहीं पड़ने देना चाहती। यह दौरा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने और संगठन को फिर से सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, राहुल गांधी का यह तीन दिन का रायबरेली दौरा कांग्रेस के लिए सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि जड़ों को मजबूत करने की बड़ी कोशिश है। जनता से संवाद, स्थानीय नेतृत्व से मुलाकात और सीनियर नेताओं के साथ रणनीतिक बैठक इन सबके जरिए कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह मैदान में लौटने के लिए पूरी तरह तैयार है और रायबरेली से इसकी शुरुआत हो रही है।

written by :- Anjali Mishra

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