उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली कटौती के बीच सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। लगातार बढ़ते तापमान और लोगों की शिकायतों के बाद बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। गर्मी के इस दौर में जहां लोग राहत के लिए बिजली पर निर्भर हैं, वहीं बार-बार कटौती और तकनीकी फॉल्ट ने परेशानी बढ़ा दी थी। अब सरकार ने साफ संकेत दिया है कि बिजली व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद बिजली विभाग और प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया गया है। सरकार ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए बड़े फैसले लिए हैं ताकि लोगों को गर्मी के बीच राहत मिल सके और अनावश्यक कटौती पर रोक लगाई जा सके।
सरकार की ओर से Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि शहरों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 18 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब प्रदेश के कई इलाकों से बिजली कटौती को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं।
इसके साथ ही बिजली सप्लाई में किसी भी तरह का फॉल्ट आने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि खराबी की स्थिति में सप्लाई बहाल करने में देरी नहीं होनी चाहिए और शिकायतों का तेजी से निस्तारण किया जाए, ताकि लोगों को लंबे समय तक परेशानी का सामना न करना पड़े।
सरकार ने सिर्फ निर्देश जारी करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कार्रवाई भी शुरू कर दी है। लापरवाही के आरोप में दो अधिकारियों को सस्पेंड किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस कदम को स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अब जिम्मेदारी तय होगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी।
भीषण गर्मी के दौरान बिजली की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों के अधिक इस्तेमाल से बिजली नेटवर्क पर दबाव भी बढ़ता है। ऐसे में सप्लाई बनाए रखना बिजली विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था और फॉल्ट मैनेजमेंट भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि समय पर तकनीकी समस्याओं को ठीक नहीं किया जाए तो छोटे फॉल्ट भी बड़े संकट में बदल सकते हैं।
फिलहाल सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट दिखाई दे रहा है गर्मी के मौसम में लोगों को राहत देना प्राथमिकता है और बिजली व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। अब देखना होगा कि इन सख्त निर्देशों और कार्रवाई का जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाई देता है।
written by:- Anjali Mishra
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