उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 2026-27 काफी महत्वपूर्ण और चर्चा से भरपूर नजर आ रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि इस बार राज्यपाल के अभिभाषण के साथ आर्थिक सर्वेक्षण भी विधानसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह पहली बार होगा जब कोई राज्य अपना आर्थिक सर्वेक्षण विधानसभा में रखेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर साफ हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू राज्य’ की पुरानी छवि से बाहर निकलकर “ब्रेकथ्रू स्टेट” के रूप में उभर रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा सत्र से पहले पत्रकारों को बताया कि यूपी ने कानून-व्यवस्था में सुधार, निवेश में वृद्धि और विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से देश में नई पहचान बनाई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार हर मुद्दे पर खुलकर चर्चा करने के लिए तैयार है और राज्य के हित में काम करना उसकी पहली प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समस्या का हल टकराव से नहीं, बल्कि संवाद और बातचीत से निकलता है।
मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि सभी पक्ष मिलकर प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा करें। उनके मुताबिक लोकतंत्र में संवाद ही सबसे मजबूत रास्ता है और इसी के जरिए जनता से जुड़े सवालों का समाधान होना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि सरकार जनहित के मुद्दों को नजरअंदाज नहीं करेगी और हर प्रकार की बातचीत के लिए तैयार है।
हालांकि विधानसभा सत्र का पहला दिन विरोध प्रदर्शन के कारण तनावपूर्ण रहा। मुख्य विपक्षी दल सपा के सभी विधायक, किसान नेता चौधरी चरण सिंह की मूर्ति के पास एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे। उन्होंने प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, कमजोर स्वास्थ्य सेवाएं, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के बकाया भुगतान जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान सपा नेताओं ने बैनर और पोस्टर हाथ में लेकर सरकार पर जनहित के मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने नारेबाजी भी की और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। विरोध की वजह से विधानसभा का माहौल पहले ही दिन से गरमाया और सियासी टकराव देखने को मिला।
इस विरोध प्रदर्शन के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सत्र में ठोस नीति और विकास योजनाओं पर फोकस रहेगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि बजट सत्र में प्रदेश के किसानों, मजदूरों और व्यापारियों के हित में कई बड़े फैसले लिए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट सत्र का परिणाम सिर्फ आर्थिक और विकास योजनाओं तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह राजनीतिक रुख और विधानसभा की कार्यप्रणाली पर भी असर डालेगा। सरकार और विपक्ष के बीच हो रहे संवाद और टकराव से राज्य की राजनीति में उत्सुकता और ध्यान बढ़ा है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह बजट सत्र राजनीतिक हलचल, आर्थिक योजना और संवाद की मिसाल बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संवादात्मक रुख और विपक्षी दलों की सख्त आलोचना इस सत्र को सियासी और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम बना रही है।
written by :- Anjali Mishra
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