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हिंद महासागर में चागोस द्वीप और बदलती वैश्विक रणनीति: भारत, अमेरिका और मॉरीशस की दृष्टि !

हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीप समूह एक बार फिर वैश्विक राजनीति और सुरक्षा मामलों की सुर्खियों में है। इस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप डिएगो गार्सिया अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा बन चुका है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में अहम भूमिका निभाता है। हालाँकि, चागोस द्वीपों का आधिकारिक नियंत्रण अब मॉरीशस के पास है, जिसे लेकर अमेरिका असहज महसूस कर रहा है और क्षेत्रीय रणनीति पर नई चुनौतियाँ उभर रही हैं।

सुरक्षा और रणनीतिक हितों को देखते हुए अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल 24–25 फरवरी को मॉरीशस का दौरा करने वाला है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा साझेदारी और समुद्री सहयोग को मजबूत करना है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि हिंद महासागर में अपनी स्थिति बनाए रखना और मॉरीशस के साथ रणनीतिक तालमेल विकसित करना उनकी वैश्विक समुद्री नीति के लिए महत्वपूर्ण है।

ब्रिटेन और चागोस के बीच हुए समझौते के बाद स्थिति में बदलाव आया है। ब्रिटेन ने लंबे समय तक चागोस द्वीपों पर अपनी सत्ता बनाए रखी थी, लेकिन मॉरीशस को इसका अधिकार मिलने के बाद अमेरिका और ब्रिटेन दोनों ही देशों को नए रणनीतिक समीकरणों का सामना करना पड़ रहा है। इस बदलती स्थिति पर भारत भी गहरी नजर रखे हुए है, क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के सुरक्षा और समुद्री हित सीधे जुड़े हैं।

इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम के बीच फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। इस वार्ता में दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। भारत मॉरीशस के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है, ताकि हिंद महासागर में सुरक्षा और आर्थिक हित सुनिश्चित किए जा सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि चागोस द्वीपों पर नियंत्रण का मुद्दा केवल अमेरिका और मॉरीशस तक सीमित नहीं है। यह पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा, व्यापार मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक संतुलन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में भारत के लिए भी मॉरीशस के साथ मजबूत सहयोग बेहद जरूरी है।

डिएगो गार्सिया पर अमेरिकी सैन्य अड्डा क्षेत्रीय सुरक्षा, नौसैनिक रणनीति और युद्धाभ्यास के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस अड्डे का नियंत्रण और मॉरीशस के साथ अमेरिकी वार्ता हिंद महासागर में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए भारत ने इस पूरे प्रकरण पर गहरी नजर रखी हुई है और दोनों देशों के बीच तालमेल बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

भारत-मॉरीशस रणनीतिक साझेदारी के तहत समुद्री सहयोग, आतंकवाद रोकथाम, साइबर सुरक्षा और समुद्री संसाधनों के प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यह द्विपक्षीय साझेदारी न केवल दोनों देशों के हित में है, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी अहम भूमिका निभाती है।

संक्षेप में कहा जाए तो चागोस द्वीप समूह और डिएगो गार्सिया के अमेरिकी अड्डे के इर्द-गिर्द हाल ही में उठी रणनीतिक हलचल ने हिंद महासागर में वैश्विक और क्षेत्रीय शक्तियों के समीकरण को नई दिशा दी है। भारत, मॉरीशस और अमेरिका की भूमिका इस क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री सहयोग के मामले में निर्णायक साबित होने वाली है। इस पूरे मामले पर नजर रखना अब न केवल सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए बल्कि आम जनता और वैश्विक राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है।

written by :- Anjali Mishra

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