लखनऊ — एक ओर जहां देश की सीमाओं पर हालात हर पल बदल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों को बड़ा झटका लग सकता है। केंद्र और राज्य सरकारें सुरक्षा मामलों में अलर्ट मोड पर हैं, और ऐसे में नई तबादला नीति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
सीमा पर बढ़ते तनाव और पाकिस्तान के साथ बिगड़ते हालात के बीच किसी भी समय भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सेना प्रमुखों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर उन्हें आवश्यकतानुसार “खुली छूट” दे दी है। इसके साथ ही गृह मंत्री अमित शाह भी लगातार सुरक्षा एजेंसियों और अधिकारियों के साथ हालात की निगरानी कर रहे हैं।
इन परिस्थितियों में यदि युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो उत्तर प्रदेश सरकार की हालिया स्थानांतरण नीति प्रभावित हो सकती है, जिस पर पहले ही हजारों कर्मचारी नजरें टिकाए बैठे हैं।
नई स्थानांतरण नीति 2025-26 : क्या है खास?
योगी सरकार ने मंगलवार को वर्ष 2025 -26 के लिए नई स्थानांतरण नीति को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत: समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों का तबादला जनपद में 3 वर्ष और मंडल में 7 वर्ष की सेवा पूरी करने के आधार पर किया जाएगा।
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समूह ‘ग’ और ‘घ’ में सबसे पुराने अधिकारियों का पहले तबादला किया जाएगा।
समूह ‘क’ और ‘ख’ में अधिकतम 20 प्रतिशत, जबकि समूह ‘ग’ और ‘घ’ में अधिकतम 10 प्रतिशत अधिकारियों का तबादला किया जा सकेगा।
सभी स्थानांतरण 30 जून 2025 तक पूर्ण किए जाने की संभावना है।
हजारों कर्मचारी जो बीते एक वर्ष से स्थानांतरण का इंतजार कर रहे थे, उन्हें अब दोहरी चिंता सताने लगी है — एक ओर नई नीति की प्रक्रिया, दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हालात। यदि युद्ध जैसी कोई परिस्थिति बनती है तो पूरा सरकारी तंत्र सुरक्षा और आपात प्रबंधन में जुट जाएगा, जिससे स्थानांतरण प्रक्रिया या तो टल सकती है या अनिश्चितकाल के लिए स्थगित भी हो सकती है।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है — एक तरफ सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना, दूसरी तरफ सरकारी तंत्र की नियमित प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी सुचारु बनाए रखना। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में हालात क्या मोड़ लेते हैं और क्या कर्मचारी राहत की सांस ले पाएंगे या फिर उन्हें और इंतजार करना होगा।
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