जनगणना 2027 इस बार अपने नए और आधुनिक तरीके को लेकर शुरुआत से ही चर्चा में है। सरकार ने पहली बार लोगों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का विकल्प दिया है, जिसे “सेल्फ एन्यूमरेशन” कहा जा रहा है।
इस पहल का असर अब साफ नजर आने लगा है। अब तक करीब 82 लाख परिवारों ने इस डिजिटल विकल्प का इस्तेमाल करते हुए अपनी जानकारी खुद दर्ज की है, जो एक बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।
सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा से लोगों को सरकारी कर्मचारियों के इंतजार की जरूरत नहीं पड़ती। वे अपने समय और सुविधा के अनुसार ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया ज्यादा लचीली और आसान हो गई है।
इस डिजिटल बदलाव का एक बड़ा फायदा यह भी है कि डेटा कलेक्शन की गति पहले के मुकाबले काफी तेज हो गई है। इससे सरकार को जल्दी और सटीक आंकड़े मिलने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से जनगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी, क्योंकि लोग खुद अपनी जानकारी सीधे सिस्टम में दर्ज कर रहे हैं।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं, जैसे इंटरनेट की उपलब्धता और डिजिटल साक्षरता। खासकर ग्रामीण इलाकों में हर व्यक्ति के लिए इस सुविधा का उपयोग करना अभी भी आसान नहीं है।
इसके बावजूद, सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है, जो भविष्य में अन्य सरकारी प्रक्रियाओं के लिए भी रास्ता खोल सकता है।
आगे चलकर, पारंपरिक तरीके और डिजिटल सिस्टम दोनों को मिलाकर जनगणना को और प्रभावी बनाने की योजना भी बनाई जा रही है।
कुल मिलाकर, जनगणना 2027 में सेल्फ एन्यूमरेशन की शुरुआत ने इस प्रक्रिया को आधुनिक, तेज और अधिक सुविधाजनक बना दिया है, जो भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।
written by :- Anjali Mishra
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