उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) में तबादले अब नीतियों से नहीं, “लिफाफों” से तय हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखाते हुए विभाग के भीतर एक बड़ा खेल चल रहा है—जिसमें ईमानदारी से काउंसलिंग के जरिए तबादला पाने वाले 95 जूनियर इंजीनियरों को किनारे कर, 100 से अधिक “लिफाफाधारकों” को मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है।
काउंसलिंग सिर्फ दिखावा?PWD में JE के ट्रांसफर की प्रक्रिया में जो 10% का कोटा तय था, उसके तहत करीब 200-300 ट्रांसफर होने चाहिए थे। लेकिन हुआ क्या? सिर्फ 95 नाम निकाले गए – और उसके बाद शुरू हुआ असली खेल!
सूत्रों की मानें तो 5 लाख रुपये तक की वसूली हर JE से की जा रही है। कुछ को तो यह तक पता है कि वे “प्रांतीय खंड लखनऊ” भेजे जा रहे हैं—क्योंकि “पैसा पहुंचा दिया गया है।”
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इस घोटाले का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि JE के ट्रांसफर की फाइल सीधे मंत्री तक जा रही है, bypass करते हुए बाकी प्रक्रिया को। जिन स्थानों पर पहले से शिकायत थी कि मंत्री के इर्द-गिर्द के लोग पैसे ले रहे हैं—अब वहीं से पोस्टिंग “फिक्स” हो रही है।
सवाल उठते हैं:
क्या सरकार को यह “लिफाफा नीति” मंज़ूर है?
जिन 95 ईमानदार इंजीनियरों ने काउंसलिंग से ट्रांसफर पाया, उनके साथ यह अन्याय क्यों?
क्या मुख्यमंत्री को इस घोटाले की भनक भी है?
आखिर PWD में इतनी हिम्मत कैसे, कि जीरो टॉलरेंस की सरकार को ही आंखों में धूल झोंक दी जाए?
सूत्र कहते हैं: “खाने के दांत अलग हैं, दिखाने के अलग। काउंसलिंग एक नौटंकी थी, असली खेल तो ‘लिफाफे’ से हो रहा है।”
PWD में एक बार फिर “स्थानांतरण उद्योग” का जिन्न बोतल से बाहर आ चुका है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि कितने पैसे में तबादला हो रहा है, सवाल यह है—क्या मुख्यमंत्री की नाक के नीचे ये सब कुछ जानबूझकर हो रहा है, या फिर उन्हें गुमराह किया जा रहा है? हालात ये है कि विभागीय जेई इस तरह का एलान कर रहे है कि फलानी सीट खाली रखो मैं आ रहा हु ये आत्मविश्वश आखिर दें कौन रहा है कैसे कोई कर्मचारी बिना सूची जारी हुए अपने तबादले का स्थान बता सकता है ,ये सब तभी सम्भव है जब लिफाफा नीति जम कर चली हो !
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