देश में लंबे समय से चर्चा का विषय बने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां अब और तेज होती दिखाई दे रही हैं। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC अब अलग-अलग राज्यों में जाकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों की राय जुटाने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। इसी कड़ी में समिति की टीम अब गुजरात पहुंच गई है, जहां कई अहम राजनीतिक मुलाकातों और चर्चाओं का दौर शुरू होने वाला है। इस दौरे को देश की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि समिति के 39 सदस्य इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों से मुलाकात करेंगे। समिति का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग विचारों को समझना और प्रस्ताव को लेकर सभी पक्षों की राय जानना है। क्योंकि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसा प्रस्ताव केवल चुनावी प्रक्रिया का विषय नहीं बल्कि देश की राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव से जुड़ा मुद्दा माना जा रहा है।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की अवधारणा का मतलब लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा चुनावों को एक साथ कराना है। समर्थकों का कहना है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासनिक संसाधनों पर दबाव घटेगा और विकास कार्यों में बाधा कम आएगी। वहीं आलोचकों का मानना है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण लोकतंत्र में यह मॉडल कई व्यावहारिक और संवैधानिक चुनौतियां भी पैदा कर सकता है।
गुजरात दौरे के दौरान समिति कई राजनीतिक दलों की राय सुनने वाली है। इसी प्रक्रिया के तहत Priyanka Gandhi समेत विभिन्न दलों के नेताओं से भी बातचीत होने की चर्चा है। अलग-अलग दलों की राय और सुझाव समिति की अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ औपचारिक बैठक नहीं बल्कि आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण चरण हो सकता है। क्योंकि इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए केवल राजनीतिक सहमति ही नहीं बल्कि संवैधानिक और प्रशासनिक स्तर पर भी व्यापक बदलावों की जरूरत पड़ सकती है।
इस मुद्दे पर देशभर में पहले से ही बहस जारी है। कुछ राजनीतिक दल इसे चुनावी सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ दल इसे संघीय ढांचे और क्षेत्रीय राजनीति के नजरिए से देख रहे हैं। यही वजह है कि हर राजनीतिक दल अपनी अलग राय और दृष्टिकोण सामने रख रहा है।
गुजरात में JPC की मौजूदगी ने इस बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में समिति किन सुझावों को प्राथमिकता देती है और किन मुद्दों पर ज्यादा चर्चा होती है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी। क्योंकि यह सिर्फ एक प्रस्ताव नहीं बल्कि भारत की चुनावी व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं और देश की नजर इस प्रक्रिया पर टिकी हुई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि अलग-अलग दलों की राय और सुझावों के बाद ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की दिशा में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
written by:- Anjali Mishra
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