उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा के दौरान माहौल काफी तीखा हो गया। रागिनी सोनकर ने सरकार पर सीधे सवाल उठाते हुए इस पूरे सत्र की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए।
उन्होंने कहा कि यह विशेष सत्र महिलाओं के अधिकारों से ज्यादा एक राजनीतिक रणनीति जैसा लग रहा है। उनके अनुसार, अगर वास्तव में सरकार महिला सशक्तिकरण को लेकर गंभीर होती, तो फैसले इतने देर से और औपचारिक तरीके से लागू नहीं किए जाते।
रागिनी सोनकर ने 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल का भी जिक्र किया और कहा कि इसे लागू करने में जिस तरह देरी और प्रक्रिया अपनाई गई, वह सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आधी रात में नोटिफिकेशन जारी करना पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
उनके इस बयान के बाद सदन में चर्चा और तेज हो गई, और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दोनों पक्षों की अलग-अलग राय सामने आई।
समाजवादी पार्टी की विधायक ने आगे कहा कि आज प्रदेश की महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। उनके अनुसार, कानून व्यवस्था की स्थिति भी महिलाओं की चिंता बढ़ा रही है।
अपने भाषण के दौरान रागिनी सोनकर भावुक हो गईं और उन्होंने कहा—“मैं यूपी की नारी हूं, हर रोज जलाई जाती हूं।” इस बयान के बाद सदन में माहौल काफी गंभीर और भावनात्मक हो गया।
सत्तापक्ष ने इस बयान पर आपत्ति जताई, जबकि विपक्ष ने इसे महिलाओं की वास्तविक स्थिति का प्रतिबिंब बताया। इस मुद्दे पर सदन में देर तक बहस चलती रही।
महिला आरक्षण और सुरक्षा जैसे मुद्दे पर यह बहस दिखाती है कि राजनीतिक मंच पर नीतियों के साथ-साथ भावनात्मक और सामाजिक मुद्दे भी गहराई से जुड़े हुए हैं।
कुल मिलाकर, यह सत्र महिला आरक्षण के समर्थन और विरोध से आगे बढ़कर राजनीतिक बयानबाजी का बड़ा मंच बन गया, जिसने सदन का माहौल काफी गर्म कर दिया।
written by :- Anjali Mishra
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