रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4–5 दिसंबर को भारत की बेहद महत्वपूर्ण यात्रा पर आ रहे हैं, जो सिर्फ एक राजनीतिक मुलाकात नहीं बल्कि आने वाले वर्षों की भू-राजनीतिक दिशा तय करने वाली घटना मानी जा रही है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी शिखर वार्ता और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित राजकीय भोज इस दौरे के रणनीतिक महत्व को और गहरा बनाते हैं। भारत और रूस दशकों पुराने रक्षा साझेदार रहे हैं, लेकिन इस बार दांव पहले से कहीं बड़ा है एक ऐसी रक्षा साझेदारी, जो आने वाले दशक में भारत की सुरक्षा क्षमता की रीढ़ बनने वाली है।
कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार की बातचीत में इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा डील पर मुहर लग सकती है। इसमें S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का अगला चरण, सबसे आधुनिक Su-35 फाइटर जेट, और कई हाई-टेक सैन्य सिस्टम शामिल हो सकते हैं। भारत पहले से ही रूस के S-400 सिस्टम का उपयोग कर रहा है, जिसने देश की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाया है। अगर नई डील पर समझौता होता है, तो भारत की एंटी-मिसाइल क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। यह कदम चीन और पाकिस्तान की ओर से बढ़ते खतरों को देखते हुए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।
पुतिन की इस यात्रा का टाइमिंग भी बहुत मायने रखता है दुनिया वर्तमान में भू-राजनीतिक बदलावों से गुजर रही है। यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पश्चिमी देशों से दूरी पर है, और ऐसे समय में भारत रूस के लिए स्थिर और भरोसेमंद साझेदार बना हुआ है। भारत भी अपनी विदेश नीति को “संतुलन” और “बहुध्रुवीयता” की ओर मोड़ रहा है, जहाँ अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों के साथ समान रिश्ता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
इस मुलाकात के दौरान सिर्फ हथियारों की बात नहीं होगी। ऊर्जा, स्पेस टेक्नोलॉजी, आर्कटिक कोऑपरेशन, ट्रेड कॉरिडोर, और न्यू इंडिया न्यू रूस बिजनेस विज़न पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। खासकर रक्षा निर्माण को लेकर “मेक इन इंडिया + मेक फॉर वर्ल्ड” मॉडल पर बड़ी साझेदारी हो सकती है, जिसमें भारत में ज्वाइंट प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर शामिल है।
भारत के लिए यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि एशिया में शक्ति संतुलन नई दिशा ले रहा है। रूस की तकनीक, भारत की कूटनीति और बदलते वैश्विक समीकरण इस यात्रा को और भी अहम बना देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस यात्रा में भारी-भरकम समझौतों की घोषणा होती है, तो यह 21वीं सदी की सबसे मजबूत इंडिया–रूस सुरक्षा धुरी साबित हो सकती है।
दुनिया की नज़रें अब दिल्ली पर टिक गई हैं क्या पुतिन की इस यात्रा से सच में भारत की रक्षा शक्ति नई उड़ान भरेगी? क्या दोनों देश मिलकर एक नया सामरिक अध्याय लिखने जा रहे हैं? आने वाले दिन बेहद निर्णायक हैं।
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