लखनऊ से सामने आई इस बड़ी खबर ने उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल को पत्र भेजकर मांग की है कि मानव सम्पदा पोर्टल को 28 फरवरी 2026 तक फिर से खोला जाए, ताकि लंबित प्रक्रियाएं पूरी हो सकें और कर्मचारियों का वेतन जारी हो सके।
कर्मचारियों का कहना है कि जनवरी महीने का वेतन नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। घर का खर्च चलाना, बच्चों की स्कूल फीस भरना और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है। कई कर्मचारियों ने बताया कि वेतन रुकने से परिवार की आर्थिक योजना पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
मानव सम्पदा पोर्टल सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई प्रशासनिक कार्यों के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म माना जाता है। इसमें डेटा अपडेट, उपस्थिति, अवकाश और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही वेतन जारी होता है। ऐसे में पोर्टल बंद होने या समय सीमा खत्म होने से हजारों कर्मचारियों का भुगतान अटक गया है।
परिषद ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि कई कर्मचारी तकनीकी कारणों या समय की कमी के चलते पोर्टल पर जरूरी जानकारी अपडेट नहीं कर पाए, जिसके कारण उनका वेतन अटक गया। परिषद का कहना है कि यदि समय सीमा बढ़ा दी जाए तो अधिकांश कर्मचारी अपनी प्रक्रिया पूरी कर पाएंगे और समस्या का समाधान हो जाएगा।
इस मुद्दे ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि यदि सिस्टम में तकनीकी या प्रक्रियात्मक बाधा है तो उसकी सजा कर्मचारियों को नहीं मिलनी चाहिए। वे चाहते हैं कि सरकार संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत राहत दे।
विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन जैसी बुनियादी आवश्यकता में देरी कर्मचारियों के मनोबल पर सीधा असर डालती है। इससे कार्यक्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में त्वरित समाधान जरूरी होता है।
परिषद ने सरकार से अपील की है कि पोर्टल की समय सीमा बढ़ाकर कर्मचारियों को राहत दी जाए और जल्द से जल्द वेतन जारी करने के निर्देश दिए जाएं। उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानवीय मुद्दा भी है।
अब सभी की नजर राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हुई है। यदि जल्द निर्णय लिया जाता है तो हजारों कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, लेकिन देरी होने पर असंतोष बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
फिलहाल कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी परेशानी को समझेगी और जल्द कोई सकारात्मक कदम उठाएगी, क्योंकि उनके लिए यह मामला सिर्फ वेतन का नहीं बल्कि परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों और आर्थिक स्थिरता का सवाल बन चुका है।
written by :- Anjali Mishra
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