भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में तुर्की और अजरबैजान ने साथ दिया था. ये साथ अब दोनों ही देशों को भारी पड़ा रहा है. उत्तर प्रदेश ने तुर्की और अज़रबैजान के साथ व्यापारिक संबंधों में कड़ा रुख अपनाया है जिससे दोनों देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. यहां से आने वाले उत्पादों के सौदे निरस्त कर दिए गए हैं। पर्यटन क्षेत्र पर सबसे ज़्यादा प्रभाव पड़ा है, लगभग 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. फल, मसाले और अन्य उत्पादों के आयात पर भी रोक लगने से व्यापार प्रभावित हुआ है. यूपी के लोग अब घरेलू पर्यटन स्थलों को तरजीह दे रहे हैं. यूपी में तुर्किये के सेब, सूखे मेवे, कालीन, सिल्क, लिनेन व खास मसालों का करीब 1000 करोड़ रुपये का बाजार है। वहीं, अजरबैजान की चाय-काफी और सिरेमिक का बाजार यूपी है.
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पिछले तीन दिन में ही 150 करोड़ से ज्यादा के आर्डर रोके जा चुके हैं। कानपुर के थोक मसाला कारोबारी विश्वनाथ अग्रवाल ने बताया कि इन देशों से आने वाले खाद्य उत्पादों की उच्च वर्ग में मांग ज्यादा है। लेकिन अब दिए गए आर्डर निरस्त किए जा रहे हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन (फियो) के मुताबिक कारोबारी संबंध वाले शीर्ष 10 देशों में से न तो अजरबैजान है और न ही तुर्किये। इन देशों से व्यापार न होने से भारत को फर्क नहीं पड़ेगा। चमड़ा निर्यात परिषद के पूर्व चेयरमैन मुख्तारुल अमीन ने बताया कि तुर्किये से आने वाले फिनिस्ड लेदर का बहिष्कार कर दिया गया है।चमड़ा निर्यात परिषद के पूर्व चेयरमैन मुख्तारुल अमीन ने बताया कि तुर्किये से आने वाले फिनिस्ड लेदर का बहिष्कार कर दिया गया है। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तुर्की और चाइना ने खुले तौर पर पाकिस्तान का समर्थन किया है. इस घटनाक्रम से आक्रोशित होकर मंडी के थोक व्यापारियों ने दोनों देशों के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार करने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि जो देश भारत के विरोधियों का साथ देते हैं, उनसे व्यापार करना देशहित के खिलाफ है.
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