बरेली की राजनीति इन दिनों एक वायरल वीडियो को लेकर गर्मा गई है। मीरगंज से बीजेपी विधायक डीसी वर्मा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जिसमें वे भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होकर नारेबाज़ी करते दिखाई दे रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस वीडियो में विधायक खुद उत्तराखंड सरकार के खिलाफ “मुर्दाबाद” के नारे लगाते नजर आ रहे हैं। भाजपा के एक विधायक का अपनी ही पार्टी शासित राज्य सरकार के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन करना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
यह पूरा मामला हल्द्वानी में हुए अमित मौर्य हत्याकांड से जुड़ा है। घटना के बाद से ही आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पीड़ित परिवार और स्थानीय संगठनों में आक्रोश है। भीम आर्मी इस मामले में लगातार प्रदर्शन कर रही है और आरोप लगा रही है कि उत्तराखंड सरकार कार्रवाई करने में टालमटोल कर रही है। इसी मुद्दे पर मीरगंज क्षेत्र में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जहां बीजेपी विधायक डीसी वर्मा भी पहुंच गए।
वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि विधायक भीड़ के बीच खड़े हैं और नारेबाज़ी के दौरान “उत्तराखंड सरकार मुर्दाबाद” के स्वर उनके मुंह से भी निकलते हैं। यह दृश्य लोगों के लिए किसी बड़े सरप्राइज़ से कम नहीं रहा, क्योंकि किसी विधायक का इस तरह से पार्टी लाइन से हटकर विरोध करना बेहद असामान्य माना जाता है। वीडियो सामने आने के बाद भाजपा संगठन के भीतर भी असहज स्थिति बन गई है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि डीसी वर्मा पर क्षेत्र के लोगों ने दबाव बनाया था कि वे इस विरोध में शामिल हों। विधायक का दावा है कि वे जनता की भावनाओं को समझने और उनके साथ खड़े होने के लिए कार्यक्रम में गए थे। हालांकि, उनके इस कदम को लेकर अब राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है या जनता के हित में उठाया गया एक साहसी कदम है।
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इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष को भी भाजपा पर हमला करने का मौका मिल गया है। कांग्रेस और सपा नेताओं ने कहा है कि जब भाजपा के विधायक ही अपनी सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगें, तो यह साफ संकेत है कि सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही। दूसरी ओर, भाजपा के कुछ नेता इस वीडियो को लेकर बचाव की मुद्रा में हैं और कह रहे हैं कि यह स्थिति भावनात्मक दबाव की वजह से बनी होगी।
कुल मिलाकर, मीरगंज से बीजेपी विधायक डीसी वर्मा का यह वीडियो पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। एक ओर पार्टी अनुशासन और संगठन की मर्यादा है, तो दूसरी ओर जनता के दबाव में आए विधायक का विरोध प्रदर्शन। आने वाले दिनों में भाजपा इस मामले को कैसे संभालती है और विधायक के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
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