उनके कथन को लेकर मराठी समुदाय में गहरी नाराज़गी देखने को मिल रही है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
विवाद की शुरुआत उस टिप्पणी से हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज युद्ध से थककर आराम करना चाहते थे। इस बयान को कई लोगों ने ऐतिहासिक तथ्यों से अलग और गलत व्याख्या बताया है, जिसके बाद विरोध तेज हो गया।
मराठी समाज और इतिहास से जुड़े कई समूहों का कहना है कि शिवाजी महाराज की छवि को इस तरह प्रस्तुत करना उनकी विरासत का अपमान है। लोगों का मानना है कि यह बयान ऐतिहासिक व्यक्तित्व को कमजोर तरीके से पेश करता है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस पूरे मामले में फिल्म अभिनेता रितेश देशमुख ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस बयान को “तोड़-मरोड़ कर पेश की गई बकवास” बताया और साफ कहा कि शिवाजी महाराज की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
रितेश देशमुख ने यह भी कहा कि किसी भी ऐतिहासिक नायक के बारे में गलत या अधूरी जानकारी फैलाना समाज में भ्रम पैदा करता है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनकी प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद और ज्यादा सुर्खियों में आ गया है।
इस मामले को और भी संवेदनशील इसलिए माना जा रहा है क्योंकि रितेश देशमुख जल्द ही फिल्म “राजा शिवाजी” में छत्रपति शिवाजी महाराज का किरदार निभाने वाले हैं। ऐसे में उनके बयान ने इस मुद्दे को फिल्म और इतिहास दोनों से जोड़ दिया है।
सोशल मीडिया पर भी इस विवाद को लेकर दो अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। एक पक्ष इसे धार्मिक और ऐतिहासिक भावनाओं से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे बयान की गलत व्याख्या बता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर टिप्पणी करते समय बेहद सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि वे केवल इतिहास का हिस्सा नहीं होते बल्कि लाखों लोगों की भावनाओं से भी जुड़े होते हैं।
कुल मिलाकर, यह विवाद अब सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इतिहास, आस्था और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है, जो आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
written by :- Anjali Mishra
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