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मायावती ने साफ किया: 2027 में बसपा अकेले लड़ेगी, गठबंधन की अटकलें हैं फर्जी !

उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलकों में जो भी गठबंधन की चर्चा चल रही थी, उस पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने खुद ऐलान कर दिया है कि पार्टी किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बसपा 2007 की तरह अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और विपक्षी दल फर्जी खबरें फैलाकर पार्टी के कार्यकर्ताओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

मायावती ने इस बात को 9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर की गई अपनी घोषणा दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस, सपा और भाजपा के साथ पहले किए गए गठबंधनों से बसपा को नुकसान हुआ है। इसलिए अब पार्टी किसी के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेगी और पूरी ताकत अपने दम पर जीत हासिल करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी की रणनीति और संगठन मजबूत हैं और कार्यकर्ताओं को सिर्फ अपने बूथ स्तर तक काम करने की जरूरत है।

दिल्ली में उन्हें मिलने वाले बंगले के सवाल पर मायावती ने साफ किया कि यह केवल सुरक्षा कारणों से दिया गया है, इससे कोई राजनीतिक संदेश नहीं निकलता। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पार्टी का फोकस पूरी तरह उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव पर है और बाहरी घटनाओं से ध्यान नहीं भटकाना चाहिए।

सुप्रीमो ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अफवाहों और फर्जी खबरों से दूर रहें और पार्टी के संगठन को मजबूत करने में जुट जाएं। उनका कहना था कि सियासी विवाद और अटकलें पार्टी की असली ताकत को प्रभावित नहीं कर सकतीं।

मायावती ने यह भी संकेत दिया कि बसपा ने अब चुनाव की तैयारी में पूरी रणनीति तैयार कर ली है और पार्टी के पास हर जिले और बूथ स्तर पर मजबूत संगठन है। उन्होंने साफ कहा कि कार्यकर्ताओं की मेहनत और पार्टी की ताकत से ही 2027 में सफलता मिलेगी।

पूर्व अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पहले किए गए गठबंधनों से पार्टी को लाभ के बजाय नुकसान हुआ था, इसलिए इस बार कोई समझौता नहीं होगा। बसपा का मकसद खुद की ताकत पर भरोसा रखते हुए उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल करना है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह याद दिलाया कि अफवाहों और राजनीतिक दबाव से भटकने की जरूरत नहीं है। पार्टी का मिशन सिर्फ अपने दम पर विधानसभा चुनाव जीतना और उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाना है।

मायावती का यह स्पष्ट संदेश अब उत्तर प्रदेश की सियासत में बहस का केंद्र बन गया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे संकेत मान रहे हैं कि बसपा 2027 में अकेले चुनाव लड़ते हुए विपक्षी दलों के लिए चुनौती बन सकती है।

कुल मिलाकर बसपा सुप्रीमो ने गठबंधन की अफवाहों को खारिज करते हुए अपनी पार्टी को आत्मनिर्भर और मजबूत चुनाव लड़ने के लिए तैयार बताया, और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे केवल अपनी मेहनत और पार्टी संगठन पर ध्यान दें।

written by :- Shivendra Tiwari

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